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खेल जगत का रोमांच: बेंगलुरु में खेली जा रही राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में युवा धावक ने तोड़ा दस साल पुराना रिकॉर्ड

बेंगलुरु के श्री कांतीरवा स्टेडियम में चल रही राष्ट्रीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दूसरे दिन एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। ओडिशा से ताल्लुक रखने वाले उन्नीस वर्षीय युवा सनसनीखेज धावक ने पुरुषों की सौ मीटर स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए पिछले एक दशक से चले आ रहे राष्ट्रीय रिकॉर्ड को चकनाचूर कर दिया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 14:40
खेल जगत का रोमांच: बेंगलुरु में खेली जा रही राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में युवा धावक ने तोड़ा दस साल पुराना रिकॉर्ड
देश के खेलप्रेमियों के लिए आज का दिन बेहद खास बन गया जब कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के मुख्य एथलेटिक्स अछूते मैदान पर एक नया इतिहास रचा गया। सौ मीटर की फर्राटा दौड़ के फाइनल मुकाबले में जब रेस शुरू हुई तो दर्शकों की सांसें थम गईं। शुरुआती तीस मीटर के बाद अपनी अद्भुत गति से सबको पछाड़ते हुए युवा एथलीट ने फिनिश लाइन को सबसे पहले पार किया। इलेक्ट्रॉनिक टाइमिंग बोर्ड पर जब उनका समय दस सेकंड से भी कम यानी नौ दशमलव नौ आठ सेकंड आया, तो पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही उन्होंने न केवल स्वर्ण पदक जीता, बल्कि ओलंपिक और एशियाई खेलों के लिए भी अपना मजबूत दावा पेश कर दिया है।

कठिन संघर्ष और कड़ी ट्रेनिंग

इस ऐतिहासिक जीत के पीछे इस युवा खिलाड़ी का कई वर्षों का कठिन परिश्रम और समर्पण छिपा है। एक छोटे से गांव से निकलकर खेलो इंडिया योजना के तहत चुने जाने के बाद इस धावक ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनके कोच ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि पिछले एक साल से इस प्रतियोगिता के लिए विशेष तकनीक पर काम किया जा रहा था, जिसमें उनकी बॉडी पॉश्चर और स्टार्ट ब्लॉक से निकलने की गति को सुधारा गया था। एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ने भी इस युवा प्रतिभा की जमकर सराहना की और घोषणा की कि उन्हें आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर में भेजा जाएगा, ताकि वे देश के लिए ओलंपिक पदक जीतने का सपना पूरा कर सकें।

युवा एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत

इस रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन ने देश के छोटे शहरों से आने वाले हज़ारों अन्य खिलाड़ियों में एक नई ऊर्जा भर दी है। सोशल मीडिया पर खेल प्रेमियों और देश के बड़े खिलाड़ियों ने इस उभरते सितारे को बधाई दी है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार की प्रतिभाओं को सही समय पर उच्च स्तर की सुविधाएं और पोषण मिलता रहे, तो आने वाले अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत ट्रैक और फील्ड इवेंट्स में भी वैश्विक महाशक्तियों को कड़ी टक्कर दे सकता है। पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान विजेता एथलीट ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और अपने कोच को दिया, जिनकी बदौलत वे आज इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं।
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