कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
जो US लगा रहा था एक्स्ट्रा टैरिफ, अब वही पढ़ रहा कसीदे; भारत की तेल आयात नीति पर क्या बोले मार्को रुबियो      फ़्रांस के राष्ट्रपति विदेशी नेताओं पर भड़के, 'इस्लामी और प्रवासी भीड़' के आरोप पर दिया जवाब      ‘CJP प्रोटेस्ट के लिए फंडिंग कहां से आती है?’ RSS के Indresh Kumar ने उठाए सवाल      Tiger Shroff Attack Case में बड़ा खुलासा, वारदात से पहले शूटरों ने की थी बंदूक चलाने की प्रैक्टिस, हुआ था म      सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को मौत की सज़ा दिए जाने से जुड़े वे सवाल जो हैं अनसुलझे      'पहले ही बना दी बैड बॉय की इमेज', नेहा बोरा केस में HC की टिप्पणी पर सरकार की दलील- क्या ये दूध के धुले      PM बोले-कुछ लोग विदेशों में भारत को बदनाम कर रहे: कांग्रेस कब तक अपने फेल प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश क...      दिल्ली में AAP और कांग्रेस की पार्षद भिड़ीं, MCD सदन में खींचतान के बाद आई हाथापाई की नौबत     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
खेल

खिलाड़ी की लाचारी: देश के लिए चार स्वर्ण पदक जीतने के बावजूद अमरदीप को नहीं मिली नौकरी, अब सब्जी बेचने को मजबूर

देश का नाम रोशन करने के लिए अपनी जवानी और पसीना बहाने वाले एथलीट किस कदर बदहाली के दौर से गुजरते हैं, इसकी एक बानो झारखंड से सामने आई है। देश के लिए चार स्वर्ण पदक जीतने वाले अमरदीप आज अपने परिवार का पेट पालने के लिए सड़कों पर सब्जी बेचने को मजबूर हैं। सरकारी सिस्टम की उदासीनता के चलते इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी का भविष्य अंधकार में डूब गया है।

A
Ankit Yadav
03 सित 2026, 13:34
खिलाड़ी की लाचारी: देश के लिए चार स्वर्ण पदक जीतने के बावजूद अमरदीप को नहीं मिली नौकरी, अब सब्जी बेचने को मजबूर
खेल जगत से एक बेहद विचलित करने वाली और व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली खबर सामने आ रही है। झारखंड राज्य में रहने वाले अमरदीप ने अपने खेल कौशल के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर देश और अपने राज्य का मान बढ़ाया है। उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल चार स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं। जब कोई खिलाड़ी देश के लिए मेडल जीतता है, तो उससे यह उम्मीद की जाती है कि सरकार और प्रशासन उसका सम्मान करेंगे तथा उसके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उचित रोजगार या सहायता प्रदान करेंगे। लेकिन अमरदीप के मामले में ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला।

सरकारी वादों और दावों की खुली पोल

वर्षों तक कड़ी मेहनत करने और देश की झोली में पदक डालने के बाद भी अमरदीप को शासन-प्रशासन की तरफ से कोई ठोस मदद नहीं मिली। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब उन्हें किसी भी प्रकार की सरकारी नौकरी या आर्थिक सहायता नहीं मिली, तो उनके सामने विकट आर्थिक संकट खड़ा हो गया। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। अंततः, अपनी खेल की उपलब्धियों को ताक पर रखकर उन्हें पेट पालने के लिए सब्जी बेचने का कठिन रास्ता चुनना पड़ा। यह स्थिति देश के उन तमाम उभरते खिलाड़ियों के लिए भी एक डरावना सच है जो खेलों में अपना करियर बनाने का सपना देखते हैं।

प्रशासनिक उदासीनता और स्थानीय आक्रोश

इस मामले के प्रकाश में आने के बाद से स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कब तक देश के लिए मेडल जीतने वाले खिलाड़ी इस तरह से दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करते रहेंगे? खेल नीतियों और उनके क्रियान्वयन पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। क्या राज्य सरकार अब इस मामले का संज्ञान लेगी और अमरदीप को उनका बनता हक व सम्मान दिलाएगी? यह एक ऐसा गंभीर विषय है जिस पर जिम्मेदार अधिकारियों को जल्द से जल्द विचार करना चाहिए ताकि किसी अन्य खिलाड़ी को यह दिन न देखना पड़े। देशभर में इस घटना को लेकर चर्चाएं गर्म हैं और सोशल मीडिया पर भी लोग अमरदीप के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं। खेल संगठनों से भी यह मांग की जा रही है कि वे आगे आएं और इस प्रतिभावान खिलाड़ी की सुध लें। यदि समय रहते ऐसे खिलाड़ियों की मदद नहीं की गई, तो देश की युवा पीढ़ी का खेलों से मोहभंग होना तय है।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज