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खेल

खेलकूद पर संकट: पीलीभीत स्टेडियम में हॉकी मैदान का निर्माण कार्य हुआ धीमा

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिला मुख्यालय स्थित स्टेडियम में बनाए जा रहे नए हॉकी मैदान का काम काफी सुस्त गति से चल रहा है, जिसके कारण स्थानीय खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। निर्माण में हो रही इस अनावश्यक देरी से क्षेत्र की खेल गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

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Ankit Yadav
03 सित 2026, 13:18
खेलकूद पर संकट: पीलीभीत स्टेडियम में हॉकी मैदान का निर्माण कार्य हुआ धीमा
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जहां खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए बनाए जा रहे स्टेडियम के बुनियादी ढांचे का विकास बेहद सुस्त रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। स्थानीय खेल प्रेमियों और उभरते हुए खिलाड़ियों के बीच इस बात को लेकर भारी निराशा व्याप्त है कि प्रशासन और संबंधित निर्माण एजेंसियों की अनदेखी के चलते मुख्य खेल गतिविधियों पर सीधा असर पड़ रहा है। खेल मैदानों के अभाव और अधूरे पड़े कार्यों के कारण युवाओं को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए उपयुक्त मंच नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनका मनोबल भी कमजोर हो रहा है।

खेल गतिविधियों पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव

स्टेडियम परिसर के भीतर हॉकी के इस आधुनिक मैदान के निर्माण की घोषणा के समय से ही क्षेत्र के युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला था। उम्मीद जताई जा रही थी कि जल्द ही खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए एक उच्च स्तरीय टर्फ या समतल मैदान मिल जाएगा, जिससे वे राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए खुद को तैयार कर सकेंगे। हालांकि, कार्यदायी संस्था की सुस्ती और प्रशासनिक लालफीताशाही के कारण निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका है। नतीजतन, हॉकी का अभ्यास करने वाले खिलाड़ी या तो दूसरे जिलों का रुख करने को मजबूर हैं या फिर अपनी प्रैक्टिस बीच में ही छोड़ने को विवश हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और खेल संघों का कहना है कि यदि विकास कार्यों को इसी प्रकार ठंडे बस्ते में डाला जाता रहा, तो पीलीभीत की खेल संस्कृति को गहरा आघात पहुंचेगा। खेल मैदान के निर्माण में देरी न केवल वित्तीय संसाधनों के दुरुपयोग की आशंका पैदा करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में कितनी लापरवाही बरती जाती है। मैदान अधूरा होने के कारण मानसून या अन्य मौसमों में वहां जलभराव और कीचड़ की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है, जिससे स्थिति और अधिक दयनीय हो जाती है।

प्रशासनिक जवाबदेही और भविष्य की उम्मीदें

इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद अब खेल प्रेमियों और स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन से कड़ी मांग उठाई है कि वे इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करें। लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य में हो रही इस लेट-लकीफी की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और संबंधित ठेकेदारों तथा अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए ताकि कार्य तेजी से पूरा हो सके। खिलाड़ियों को उम्मीद है कि यदि समय रहते प्रशासनिक अमला हरकत में आया, तो जल्द ही रुका हुआ काम दोबारा शुरू होगा और उन्हें एक बेहतरीन खेल परिसर की सौगात मिल सकेगी, जिससे वे अपनी खेल यात्रा को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ा सकें।
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