जोशना और सेंथिलकुमार का कांस्य पदक अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित स्क्वाश स्पर्धा में भारतीय दल के वरिष्ठ तथा अनुभवी खिलाड़ियों ने अपने उच्च कोटि के खेल कौशल का परिचय देते हुए देश के लिए अमूल्य पदक पक्के किए हैं। महिला वर्ग में अनुभवी खिलाड़ी जोशना चिनप्पा ने कोर्ट पर जबरदस्त फुर्ती और रणनीतिक खेल दिखाते हुए कड़े मुकाबले में कांस्य पदक हासिल किया। ठीक इसी प्रकार पुरुष वर्ग के मुकाबलों में सेंथिलकुमार ने भी अपने बेहतरीन शॉट चयन और शानदार सहनशक्ति के दम पर पोडियम पर अपनी जगह सुनिश्चित करते हुए कांस्य पदक अपने गले में डाला। हालांकि दोनों ही खिलाड़ी खिताबी मुकाबले में प्रवेश करने से मामूली अंतर से चूक गए और उन्हें इसी संतुष्टि के साथ अपने अभियान को विराम देना पड़ा। इन दोनों खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन आने वाले अन्य टूर्नामेंटों के लिए भारतीय स्क्वाश दल का मनोबल काफी हद तक ऊंचा करने का काम करेगा क्योंकि इन मुकाबलों में दुनिया भर के शीर्ष स्तर के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे थे और वहां कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही थी।
अनाहत सिंह के सेमीफाइनल मैच का रोमांच एक तरफ जहां अनुभवी खिलाड़ियों ने कांस्य पदक जीतकर देश की झोली भरी है वहीं दूसरी तरफ युवा महिला एकल खिलाड़ी अनाहत सिंह ने अपने शानदार खेल से पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। टूर्नामेंट के महिला एकल वर्ग के तहत अनाहत का सेमीफाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक दौर से गुजर रहा है जहां उनके सामने कोर्ट पर एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी की चुनौती मौजूद है। खेल प्रेमियों और खेल विशेषज्ञों की निगाहें इस मुकाबले पर टिकी हुई हैं क्योंकि अनाहत ने इस पूरे टूर्नामेंट के दौरान जिस प्रकार की परिपक्वता और तकनीक का प्रदर्शन किया है उसने हर किसी को प्रभावित किया है। इस स्तर तक पहुंचना ही अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है और यदि वह इस सेमीफाइनल बाधा को पार करने में सफल रहती हैं तो वह देश के लिए इस प्रतियोगिता का सबसे बड़ा पदक जीतने की दौड़ में सीधे तौर पर शामिल हो जाएंगी। भारतीय स्क्वाश जगत में अनाहत को एक उभरती हुई बड़ी ताकत के रूप में देखा जा रहा है और उनका यह प्रदर्शन आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत साबित हो रहा है।
भारतीय स्क्वाश का भविष्य और आगे की राह इन पदकों के आने के बाद देश में racquet sports यानी रैकेट खेलों के प्रति रुझान में और अधिक तेजी आने की पूरी संभावना है जिससे जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तलाशने में मदद मिलेगी। खेल संघों और खेल प्रेमियों का मानना है कि इस तरह के कड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार पदक जीतना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारतीय खिलाड़ी अब वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। आने वाले दिनों में इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी ताकि उन्हें आगामी एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल जैसे बड़े आयोजनों के लिए और बेहतर सुविधाएं तथा प्रशिक्षण दिया जा सके। खिलाड़ियों के इस अनुशासित प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही समय पर उचित संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो भारतीय एथलीट दुनिया के किसी भी कोने में जाकर देश का तिरंगा शान से लहरा सकते हैं। पूरा देश अब अनाहत सिंह के सेमीफाइनल मैच के अंतिम परिणामों का इंतजार कर रहा है ताकि यह तय हो सके कि इस बार प्रतियोगिता में देश के खाते में कितने और किस रंग के पदक जुड़ने वाले हैं।