एथलेटिक्स और कबड्डी में पदक की बड़ी उम्मीदें एशियाई खेलों के छठे दिन का महामुकाबला पूरी तरह से विभिन्न खेल विधाओं में भारत की मजबूत दावेदारी के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जहां देश के शीर्ष खिलाड़ी पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। मुख्य रूप से एथलेटिक्स ट्रैक और फील्ड के मुकाबलों के अलावा कबड्डी और स्क्वैश के कोर्ट पर भी भारतीय एथलीटों का कड़ा इम्तिहान होना तय माना जा रहा है। खेल प्रेमियों की निगाहें विशेष रूप से उन स्पर्धाओं पर टिकी हुई हैं जहां पूर्व के प्रदर्शनों के आधार पर स्वर्ण पदक जीतने की सबसे ज्यादा प्रबल संभावनाएं जताई जा रही हैं। भारतीय खेल प्राधिकरण और विभिन्न राष्ट्रीय महासंघों ने इन प्रतियोगिताओं के लिए लंबे समय से अपने खिलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण शिविरों में तैयार किया था, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस महाकुंभ में अपने सर्वश्रेष्ठ खेल का प्रदर्शन कर सकें। सुबह के सत्र से ही मुकाबलों का रोमांच अपने चरम पर पहुंच चुका है और कोच तथा सहयोगी स्टाफ लगातार खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने के लिए मैदान के किनारे मुस्तैद नजर आ रहे हैं ताकि हर छोटी-सी तकनीकी बारीकी पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा जा सके और किसी भी प्रकार की गलती की गुंजाइश को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके।
खिलाड़ियों की सालों की मेहनत और कड़ा प्रशिक्षण इस स्तर की बहु-खेल प्रतियोगिताओं में सफलता प्राप्त करना किसी भी एथलीट के लिए रातों-रात मिलने वाला परिणाम नहीं होता है, बल्कि इसके पीछे वर्षों का कड़ा अनुशासन, शारीरिक सहनशीलता और मानसिक दृढ़ता की लंबी कहानी छिपी होती है। भारतीय दल के इन खिलाड़ियों ने पिछले कई महीनों से देश-विदेश में आयोजित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में हिस्सा लेकर अपनी फिटनेस और फॉर्म को परखा था, ताकि महाद्वीपीय स्तर के इस सबसे बड़े मंच पर वे किसी भी चुनौती का डटकर मुकाबला कर सकें। खेल विज्ञान विशेषज्ञों, फिजियोथेरेपिस्टों और पोषण विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम ने लगातार खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और ऊर्जा के स्तर की निगरानी की है ताकि वे थकान से बचे रहें और प्रतियोगिता के दिन अपनी पूर्ण क्षमता के साथ मैदान पर उतर सकें। इसके अलावा, खेल मंत्रालय और ओलंपिक संघ द्वारा प्रदान की गई वित्तीय सहायता तथा आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं ने भी एथलीटों को अपनी कमियों को दूर करने और अपनी स्वाभाविक खेल शैली में सुधार करने का अभूतपूर्व अवसर प्रदान किया है। इस वृहद पृष्ठभूमि के कारण ही आज पूरा देश इन स्पर्धाओं से ऐतिहासिक पदकों की उम्मीद लगाए बैठा है, क्योंकि हर एक खिलाड़ी ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए अपने निजी जीवन में अनगिनत त्याग किए हैं और हर कठिनाई का सामना करते हुए केवल देश के लिए गौरव हासिल करने के एकमात्र लक्ष्य को अपने सामने सर्वोपरि रखा है।
पदक तालिका में सुधार और भविष्य की उम्मीदें वर्तमान प्रतियोगिताओं के परिणाम आने वाले दिनों में देश के खेल परिदृश्य को नया आयाम देने में निर्णायक साबित होंगे, क्योंकि यहां मिलने वाला प्रत्येक पदक युवा पीढ़ी को खेलों को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करता है। जैसे-जैसे आज के मुकाबले अपने अंतिम चरणों की ओर बढ़ेंगे, देश भर के खेल प्रेमी अपनी स्क्रीन के सामने टकटकी लगाकर यह देखने के लिए उत्सुक रहेंगे कि भारतीय दल तालिका में अपनी स्थिति को कितना मजबूत कर पाता है। इन मुकाबलों के समापन के बाद विभिन्न खेल संघों द्वारा आगे की रणनीतियों की समीक्षा की जाएगी ताकि जो कमियां इस स्तर पर सामने आई हैं, उन्हें भविष्य की प्रतियोगिताओं से पहले पूरी तरह से दूर किया जा सके। इस महाकुंभ में मिलने वाली सफलताएं न केवल खिलाड़ियों के व्यक्तिगत आत्मविश्वास को आसमान पर पहुंचाती हैं, बल्कि खेल बुनियादी ढाचे के विकास और जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तराशने की योजनाओं को भी नई गति प्रदान करती हैं। सरकार और खेल प्रशासक इस बात से भਲੀ-भांति परिचित हैं कि इस प्रकार के बड़े मंचों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन से ही देश में खेल संस्कृति का दीर्घकालिक विकास संभव हो पाता है, और यही कारण है कि आज पूरा राष्ट्र एक स्वर में अपने सभी एथलीटों के ऐतिहासिक प्रदर्शन की कामना कर रहा है ताकि तिरंगा गर्व के साथ सबसे ऊंचे स्थान पर लहरा सके।