क्या मोदी की सुनेंगे पुतिन और युद्ध बंद कर देंगे?
नेपाल बाढ़: वायरल हुए इस सीसीटीवी फ़ुटेज के बाद यहां क्या हुआ?
सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत की जांच करेगी सीबीआई, बॉम्बे HC का आदेश
सिंधु जल संधि पर परमानेंट कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन का पाकिस्तान के पक्ष में फ़ैसला, भारत पर क्या असर?
चुपके-चुपके ईरान की ताकत बढ़ा रहा है रूस? सामने आई अमेरिका को परेशान करने वाली खबर
UP Weather Today: लखनऊ में खूब बरसे बादल, 20 जिलों में आज व कल भारी वर्षा का अलर्ट
फर्जी टोल वसूली मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, 7 राज्यों में छापेमारी
यूपी का मौसम 2 सितंबरः नौ जिलों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट, पांच दिनों तक मेहरबान रहेगा मानसून
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
एआई कैलकुलेटर का खतरा: परीक्षाओं में नकल को लेकर शिक्षा जगत में बढ़ी चिंता
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक अब कैलकुलेटर तक पहुंच चुकी है, जिसके बाद से शैक्षणिक संस्थानों और शिक्षकों के बीच परीक्षाओं में छात्रों द्वारा नकल किए जाने का डर तेजी से बढ़ने लगा है।
A
Ankit Yadav
02 सित 2026, 12:06
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में हो रहे नए और क्रांतिकारी विकास ने शिक्षा क्षेत्र के सामने एक अजीब और गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। आधुनिक तकनीक के इस दौर में अब पारंपरिक कैलकुलेटर केवल साधारण गणनाओं तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि उनमें एडवांस एआई फीचर्स को शामिल कर दिया गया है। इन आधुनिक गैजेट्स की मदद से छात्र न केवल गणितीय समीकरणों को हल कर सकते हैं, बल्कि जटिल समस्याओं के चरण-दर-चरण उत्तर भी प्राप्त कर सकते हैं। इस तकनीकी प्रगति के कारण दुनिया भर के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों तथा परीक्षा नियंत्रकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं।
परीक्षाओं की शुचिता पर संकट
एग्जाम हॉल में छात्रों की निगरानी करना हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है, लेकिन अब यह चुनौती और अधिक पेचीदा हो गई है। पारंपरिक नकल के तरीकों जैसे छोटी पर्चियों या साधारण कैलकुलेटर की सीमाएं थीं, जिनका पता शिक्षक आसानी से लगा लेते थे। हालांकि, जब से कैलकुलेटर के अंदर एआई की ताकत जुड़ी है, तब से इसे पकड़ना बेहद मुश्किल हो गया है। कई मॉडलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्मार्ट टेक्स्ट प्रोसेसिंग की सुविधा भी होती है, जिससे छात्र परीक्षा के दौरान बिना किसी बाहरी मदद के सीधे एआई से उत्तर प्राप्त करने में सक्षम हो रहे हैं। इस स्थिति के चलते शैक्षणिक परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं।
शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की तकनीक का दुरुपयोग छात्रों की वास्तविक वैचारिक क्षमता और समस्या-समाधान कौशल को कमजोर कर सकता है। जब छात्र कठिन प्रश्नों को स्वयं हल करने के बजाय एआई-सक्षम उपकरणों पर निर्भर होने लगेंगे, तो उनकी बौद्धिक वृद्धि बाधित होगी। इसके अलावा, मूल्यांकन प्रणालियों के लिए यह तय करना कठिन होता जा रहा है कि छात्र ने अपनी मेहनत से उत्तर लिखा है या फिर किसी स्मार्ट गैजेट की मदद ली है। बोर्ड परीक्षाओं से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक में इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि इन उपकरणों के उपयोग को कैसे विनियमित किया जाए।
कड़े नियमों की तैयारी
इस उभरती हुई समस्या से निपटने के लिए अब शिक्षण संस्थान और परीक्षा बोर्ड कड़े कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं। आने वाले समय में परीक्षा केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर नियमों को और अधिक सख्त बनाया जा सकता है। कई जगहों पर इस बात पर भी मंथन चल रहा है कि क्या केवल विशिष्ट प्रकार के सादे कैलकुलेटरों को ही अनुमति दी जाए और स्मार्ट फीचर्स वाले सभी उपकरणों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाए। साथ ही, शिक्षकों को भी इस नई तकनीकी से अवगत कराया जा रहा है ताकि वे छात्रों की गतिविधियों पर पैनी नजर रख सकें। तकनीक का यह नया रूप निश्चित रूप से शिक्षा के क्षेत्र में सुरक्षा और अनुशासन के नए मानदंडों को तय करने की मांग कर रहा है।