कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
सऊदी अरब में बांग्लादेशी महिला कामगार कितनी सुरक्षित हैं?      तिब्बत में आए शक्तिशाली भूकंप में कम से कम 16 लोगों की मौत, सैकड़ों ज़ख़्मी      ‘भारत हम सभी के लिए उम्मीद की किरण’, पोलैंड के प्रधानमंत्री ने की PM मोदी की जमकर तारीफ      'शिमला में भुट्टो से मिली थीं इंदिरा', रूबियो से मुंबई में मिलने के विवाद पर बोले जयशंकर      'इतना अन्याय किसी परिवार के ऊपर नहीं हुआ होगा...', अखिलेश यादव ने आजम खान के लिए ऐसा क्यों कहा?      स्पीकर ओम बिरला की दो टूक, अगर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रस्ताव...      दो चुनाव आयुक्तों की शिकायत पर कैबिनेट सचिव ने क्यों नहीं लिया एक्शन, RTI में खुलासा      टाइगर श्रॉफ की मां आयशा ने शेयर किया वीडियो, फायरिंग में टुकड़े उड़ने से बेटे का हाथ कैसा हुआ है छलनी     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
टेक्नोलॉजी

एआई नीति पर रुख: अमेरिका ने जी20 देशों से कहा कि इनोवेशन रोकने वाले नियम न बनाएं

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के नियमन को लेकर अमेरिका ने एक स्पष्ट रुख अपनाते हुए जी20 देशों से कड़े प्रतिबंधों से बचने की अपील की है ताकि तकनीकी प्रगति प्रभावित न हो।

A
Ankit Yadav
02 सित 2026, 11:58
एआई नीति पर रुख: अमेरिका ने जी20 देशों से कहा कि इनोवेशन रोकने वाले नियम न बनाएं
वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच अमेरिका ने एक बड़ा और स्पष्ट रुख सामने रखा है। जी20 देशों के मंच पर अमेरिका ने अपनी बात रखते हुए इस बात पर जोर दिया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक पर किसी भी तरह की अत्यधिक या अनावश्यक लगाम कसने से बचा जाना चाहिए। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि यदि इस उभरती हुई तकनीक पर शुरुआत में ही कड़े या अवरोध पैदा करने वाले नियम थोप दिए गए, तो इससे दुनियाभर में तकनीकी विकास और नए प्रयोगों की गति बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।

एआई में खुलापन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा

आधुनिक समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न केवल व्यापार और उद्योग बल्कि आम जनजीवन का भी एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है। अमेरिका का यह सुझाव ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया भर की सरकारें इसके संभावित जोखिमों को नियंत्रित करने के लिए अपने-अपने कानूनों को रूप देने में जुटी हुई हैं। अमेरिकी नीति निर्माताओं का तर्क है कि बहुत ज्यादा प्रशासनिक और कानूनी जटिलताएं पैदा करने से तकनीकी नवाचार का दम घुट सकता है। इसके बजाय, एक ऐसा लचीला दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए जो विकास को बढ़ावा दे और साथ ही जिम्मेदार इस्तेमाल को भी सुनिश्चित कर सके ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कोई देश पीछे न छूटे। जी20 देशों के बीच चल रही बैठकों और वार्ताओं के दौरान तकनीक के भविष्य को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं। जहां एक ओर कई यूरोपीय देश और अन्य राष्ट्र नागरिकों की सुरक्षा और डेटा गोपनीयता को प्राथमिकता देते हुए सख्त कायदे-कानून बनाने के पक्ष में हैं, वहीं अमेरिका का यह ताजा बयान पूरी तरह से मुक्त बाजार और तकनीकी स्वतंत्रता की वकालत करता है। अमेरिका का मानना है कि अत्यधिक पाबंदियों से न केवल उद्योग जगत की रफ्तार धीमी होगी, बल्कि अत्याधुनिक शोध कार्यों पर भी बुरा असर पड़ सकता है। भविष्य की रणनीतियों की बात करें तो इस वैश्विक बहस का असर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय संधियों और स्थानीय कानूनों पर पड़ना तय है। दुनिया भर के तकनीकी दिग्गजों और नीति निर्माताओं के बीच यह एक लंबी खींचतान का विषय बन चुका है कि सुरक्षा और स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बिठाया जाए। अमेरिका के इस ताजा आह्वान के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य प्रमुख आर्थिक महाशक्तियां और जी20 के सदस्य देश इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं और क्या वे अमेरिकी सुझावों को ध्यान में रखते हुए अपने नियामक ढांचे में नरमी बरतते हैं या फिर अपनी सुरक्षात्मक नीतियों पर ही कायम रहते हैं।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज