ट्राई की नई सिफारिशों का विवरण
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने 26 अक्टूबर को एक महत्वपूर्ण सिफारिश जारी की है, जो इंटरनेट के जरिए फ्री लाइव टीवी चैनल मुहैया कराने वाले एप्स की कार्यप्रणाली को बदल देगी। इन नए नियमों के दायरे में वे एप्लिकेशन आएंगे जो विभिन्न चैनल्स को एक साथ लाकर लाइव टीवी सेवा प्रदान करते हैं। टेलीकम्यूनिकेशंस एक्ट 2023 के अंतर्गत इन सेवाओं को एप्लिकेशन बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रिब्यूशन यानी एएलटीडी सेवा के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। इस श्रेणी में आने वाले किसी भी एप या वेबसाइट को सरकार से आधिकारिक लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह प्रस्तावित व्यवस्था स्मार्ट टीवी पर पहले से इंस्टॉल्ड रहने वाले एप्स पर भी समान रूप से लागू होगी, जिससे स्ट्रीमिंग मार्केट में बड़े बदलाव आने की संभावना है। हालांकि, नेटफ्लिक्स या प्राइम वीडियो जैसे ऑन-डिमांड वीडियो प्लेटफॉर्म्स इस नए नियम के दायरे से बाहर रखे गए हैं क्योंकि वे इस श्रेणी में नहीं आते हैं।
लाइसेंस प्रक्रिया और पंजीकरण शुल्क
सरकार द्वारा प्रस्तावित नियमों के अनुसार, लाइव टीवी दिखाने वाले एप्स को लाइसेंस पाने के लिए एक निश्चित प्रक्रिया से गुजरना होगा। सेवा प्रदाताओं को एक लाख रुपये की वन-टाइम एंट्री फीस का भुगतान करना होगा, साथ ही दस हजार रुपये की प्रोसेसिंग फीस भी जमा करनी होगी। प्राप्त होने वाला यह लाइसेंस 20 साल की लंबी अवधि के लिए मान्य होगा, जिसे बाद में 10-10 वर्षों के लिए नवीनीकृत किया जा सकेगा। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य इन प्लेटफॉर्म्स को एक समान कानूनी ढांचे के अंतर्गत लाना है, ताकि दर्शक और ब्रॉडकास्टर्स के हितों की रक्षा की जा सके। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने पिछले साल दिसंबर में इन फास्ट सेवाओं के लिए स्पष्ट नियम बनाने का निर्देश दिया था। फिलहाल ये सभी प्रस्ताव और सिफारिशें विचार की प्रक्रिया में हैं। जब सरकार इन प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी प्रदान कर देगी, तो इन्हें देश में आधिकारिक रूप से लागू किया जाएगा।
दर्शकों पर प्रभाव और भविष्य की स्थिति
आम दर्शकों के लिए राहत की बात यह है कि इन नए नियमों के लागू होने के बाद भी उन्हें फ्री चैनल्स देखने के लिए कोई अतिरिक्त सब्सक्रिप्शन शुल्क या नया चार्ज नहीं देना होगा। मौजूदा समय में केबल टीवी और डीटीएच ऑपरेटर्स पहले से ही सरकार के कड़े नियमों का पालन करते हैं, लेकिन इंटरनेट पर आधारित स्ट्रीमिंग एप्स के लिए अब तक कोई ठोस नीति नहीं थी। इस कदम का मकसद डिजिटल क्षेत्र में समानता लाना है। दर्शकों को यह स्पष्ट समझना चाहिए कि उनके स्मार्ट टीवी से ये एप्स अचानक गायब नहीं होने वाले हैं और न ही उन्हें इन सेवाओं के लिए जेब से पैसे खर्च करने पड़ेंगे। सरकार की मंजूरी मिलने तक दर्शक अपनी पसंदीदा लाइव टीवी स्ट्रीमिंग का आनंद बिना किसी रुकावट के उठा सकते हैं। यह बदलाव मुख्य रूप से स्ट्रीमिंग एप्स, स्मार्ट टीवी निर्माताओं और ब्रॉडकास्टर्स के कामकाज के तौर-तरीकों को विनियमित करने की एक बड़ी सरकारी पहल है।