अमेरिका की कमजोरी का घरेलू बाजार पर असर
शेयर बाजार लाइव के दौरान आज निवेशकों का ध्यान इस बात पर केंद्रित रहा कि अमेरिका की गिरावट से हमारी तेजी पर अचानक ब्रेक क्यों लग गया है। वैश्विक बाजारों में सुस्ती और अमेरिकी फ्यूचर्स के लुढ़कने के कारण घरेलू निवेशकों में चिंता का माहौल बन गया है। आज के सत्र में बाजार की शुरुआत के बाद से ही बिकवाली का दबाव देखने को मिला है। जानकारों के अनुसार वैश्विक स्तर पर मिलने वाले संकेतों का असर सीधे तौर पर भारतीय शेयर बाजारों पर पड़ता है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में होने वाले उतार-चढ़ाव और वहां के सूचकांकों में आने वाली गिरावट का असर यहां के निवेशकों की धारणा को प्रभावित करता है। आज के कारोबार में भी यही स्थिति देखने को मिली जब विदेशी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के कारण हमारे बाजार अपनी शुरुआती बढ़त को बरकरार नहीं रख पाए और कारोबार के दौरान ऊपरी स्तरों से नीचे फिसल गए। इस परिस्थिति में निवेशकों ने बेहद सतर्क रुख अपनाते हुए अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करना शुरू कर दिया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक बाजारों में जारी इस अनिश्चितता के कारण अल्पावधि में उतार-चढ़ाव का यह दौर यूं ही जारी रह सकता है।
क्रूड ऑयल और अमेरिकी फ्यूचर्स की स्थिति
बाजार में चर्चा का एक मुख्य विषय अमेरिकी फ्यूचर्स के लुढ़कने के पीछे छिपे कारण और कच्चे तेल यानी क्रूड की कीमतें भी रहीं। यह सवाल लगातार बना हुआ है कि क्या क्रूड ऑयल की चाल एक बार फिर से निवेशकों को डरा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में होने वाला उतार-चढ़ाव हमेशा से ही भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए एक बड़ा कारक रहा है। जब भी क्रूड की कीमतें बढ़ती हैं, देश में आयात का बिल बढ़ता है और इसका सीधा असर विदेशी मुद्रा भंडार तथा कंपनियों के मुनाफे पर पड़ता है। आज के सत्र में भी कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव और अमेरिकी फ्यूचर्स के कमजोर प्रदर्शन ने निवेशकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता के कारण घरेलू स्तर पर इंडेक्स की चाल धीमी हुई है। इसके अलावा अमेरिकी बाजार के फ्यूचर्स में आई गिरावट ने भी निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर दिया है। बाजार में इस बात की भी चर्चा है कि क्या क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें आने वाले दिनों में महंगाई को फिर से हवा देंगी, जिससे केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसलों पर भी असर पड़ सकता है।
निफ्टी की रुकावट और बाजार की पृष्ठभूमि
मौजूदा कारोबार में यह सवाल भी प्रमुखता से सामने आ रहा है कि क्या निफ्टी अपनी रुकावट की रेंज के पास पहुंच चुका है और बाजार में कल अचानक तूफानी तेजी क्यों आई थी। शेयर बाजार के इतिहास और तकनीकी विश्लेषण को देखें तो जब बाजार एक निश्चित दायरे में कारोबार करता है, तो वहां रुकावट या रेजिस्टेंस का स्तर बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। निफ्टी के इन स्तरों पर पहुंचने के बाद मुनाफावसूली का दौर आम बात है, जिससे सूचकांक में थोड़ी सुस्ती या गिरावट देखने को मिलती है। कल के कारोबारी सत्र में बाजार में जो तूफानी तेजी आई थी, उसने निवेशकों को रोमांचित कर दिया था, लेकिन आज की सुस्ती ने यह साफ कर दिया है कि बाजार में ऊपरी स्तरों पर टिके रहना आसान नहीं है। तकनीकी जानकारों का कहना है कि निवेशकों को बाजार के इन तकनीकी स्तरों को ध्यान में रखकर ही अपनी रणनीति बनानी चाहिए। जब तक वैश्विक मोर्चे पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती, तब तक इस प्रकार के उतार-चढ़ाव बाजार में बने रहने की पूरी संभावना है। निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचें और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही अपना ध्यान केंद्रित रखें ताकि जोखिम को कम किया जा सके।