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हाई कोर्ट की दो टूक: 'सिर्फ भगवान ही इस देश को बचा सकता है', आतंकी खतरे के चलते ड्यूटी से गायब रहने वाले बर्खास्त पुलिसकर्मी की याचिका खारिज

जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने आतंकी खतरे का हवाला देकर ड्यूटी से लगातार अनुपस्थित रहने वाले एक बर्खास्त पुलिसकर्मी की याचिका को सख्त टिप्पणी के साथ खारिज कर दिया है।

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Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 10:53
हाई कोर्ट की दो टूक: 'सिर्फ भगवान ही इस देश को बचा सकता है', आतंकी खतरे के चलते ड्यूटी से गायब रहने वाले बर्खास्त पुलिसकर्मी की याचिका खारिज
न्यायपालिका ने अनुशासनहीनता के मामलों में कड़ा रुख अपनाते हुए जम्मू-कश्मीर के एक पूर्व पुलिसकर्मी की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें उसने अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि इस तरह से अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने लगेंगे तो स्थिति अत्यंत दयनीय हो जाएगी, और इस संदर्भ में कोर्ट ने टिप्पणी की कि 'केवल भगवान ही इस देश को बचा सकता है'। बर्खास्त सिपाही ने अपनी सफाई में दावा किया था कि उसे आतंकवादियों की ओर से गंभीर धमकियां मिल रही थीं जिसके कारण वह अपनी जान बचाने के लिए ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हो सका।

अनुशासनहीनता पर शून्य सहनशीलता

अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुरक्षा बलों और पुलिस विभाग के कर्मियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे विपरीत और खतरनाक परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य का पालन पूरी निष्ठा के साथ करें। व्यक्तिगत सुरक्षा या भय का बहाना बनाकर ड्यूटी से लंबे समय तक गायब रहना किसी भी सेवा नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं हो सकता है। पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि यदि सुरक्षाकर्मी ही सुरक्षा चुनौतियों के आगे घुटने टेक देंगे तो आम नागरिकों की रक्षा कौन करेगा, और इसलिए विभाग द्वारा की गई बर्खास्तगी की कार्रवाई पूरी तरह से वैध और उचित है।

कानूनी जानकारों की प्रतिक्रिया

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च न्यायालय का यह फैसला सुरक्षा बलों के भीतर अनुशासन बनाए रखने के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। इस प्रकार के मामलों में नरमी बरते जाने से विभाग का मनोबल गिर सकता है और अनुशासनहीनता को बढ़ावा मिल सकता है। अदालत के इस कड़े निर्णय से यह संदेश साफ है कि कानूनी और प्रशासनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों से भागने की कोई छूट नहीं दी जाएगी, चाहे हालात कितने भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों।
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