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राजस्थान: साइबर ठगी के लिए 'म्यूल बैंक खातों' का बढ़ता उपयोग बना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती, हजारों खाते रडार पर

राजस्थान में साइबर ठगी में सामान्य बैंक खातों को म्यूल खातों के रूप में इस्तेमाल किए जाने से पुलिस के सामने चुनौती बढ़ी है।

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Ankit Yadav
20 अग 2026, 16:16
राजस्थान में साइबर ठगी के लिए म्यूल खातों का बढ़ता इस्तेमाल

जयपुर:

राजस्थान में साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए आम लोगों के सामान्य बैंक खातों को 'म्यूल खातों' (Mule Accounts) के रूप में इस्तेमाल करने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है, जिससे राज्य की पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने एक नई और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। साइबर ठग अब सीधे अपने खातों का उपयोग करने के बजाय भोले-भाले या पैसों का लालच देकर तैयार किए गए अन्य लोगों के खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

क्या होते हैं म्यूल खाते और कैसे होता है इनका इस्तेमाल?

  • खातों का किराए पर इस्तेमाल: साइबर अपराधी अक्सर गरीब मजदूरों, कॉलेज के छात्रों या कम आय वाले लोगों को छोटे-मोटे मुनाफे, सरकारी योजनाओं या कमीशन का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं।

  • दस्तावेजों की हेराफेरी: इन खातों के एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक और इंटरनेट बैंकिंग की डिटेल्स अपराधी अपने कब्जे में ले लेते हैं।

  • ठगी की रकम की लेयरिंग: देश के अलग-अलग हिस्सों से साइबर ठगी (जैसे डिजिटल अरेस्ट, स्टॉक मार्केट फ्रॉड या शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ठगी) के जरिए ऐंठे गए पैसों को सबसे पहले इन म्यूल खातों में ट्रांसफर किया जाता है, ताकि पुलिस की ट्रेकिंग से बचा जा सके। इसके बाद इन पैसों को क्रिप्टोकरेंसी या हवाला नेटवर्क के जरिए आगे बढ़ाया जाता है।

पुलिस और प्रशासन की सख्त कार्रवाई

इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए राजस्थान पुलिस मुख्यालय और विभिन्न जिलों की साइबर सेल ने विशेष अभियान चलाए हैं:

  • बड़े पैमाने पर कार्रवाई: राज्यभर में पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों वाले हजारों म्यूल खातों की पहचान की है और कई मामलों में अपराधियों तथा उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया है।

  • जांच का दायरा: पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में खाताधारक अनजाने में या थोड़े से पैसों के लालच में अपने खाते दूसरों को सौंप देते हैं, जिसके बाद जांच के दायरे में आने पर उन्हें भी साजिश के तहत आरोपी बनाया जा रहा है।

Tags: India
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