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रक्षा और सुरक्षा

बड़ा रक्षा सौदा: रूस से 75 सुखोई-57 फाइटर जेट खरीदने की तैयारी, लागत करीब एक लाख करोड़ रुपये

भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में एक और बड़े समझौते पर बात आगे बढ़ने की संभावना है। आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच इस विषय पर महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है, जिसके तहत 75 सुखोई-57 लड़ाकू विमानों का सौदा किया जा सकता है।

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Ankit Yadav
09 सित 2026, 13:30
बड़ा रक्षा सौदा: रूस से 75 सुखोई-57 फाइटर जेट खरीदने की तैयारी, लागत करीब एक लाख करोड़ रुपये
भारतीय रक्षा बलों की ताकत को और अधिक मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाए जाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। वैश्विक कूटनीतिक गलियारों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक, भारत सरकार रूस के साथ अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के अधिग्रहण को लेकर गंभीर चर्चा कर रही है। इस संभावित रक्षा अनुबंध के तहत लगभग 75 सुखोई-57 फाइटर जेट खरीदे जाने की बात सामने आ रही है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के उन्नत सैन्य विमानों का बेड़े में शामिल होना भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में भी एक बड़ा बदलाव लाएगा।

एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है लागत

इस विशालकाय रक्षा सौदे के वित्तीय पहलुओं पर भी शुरुआती दौर की आकलन प्रक्रिया चल रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस पूरे रक्षा समझौते पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम खर्च आ सकता है। इतनी बड़ी धनराशि भारत और रूस के बीच अब तक के सबसे बड़े रणनीतिक और व्यापारिक समझौतों में से एक होगी। इस संबंध में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर आगामी बैठकों में औपचारिक रूप से बातचीत होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन जल्द ही होने वाला है, और इस वैश्विक मंच के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय बैठक तय मानी जा रही है। माना जा रहा है कि शिखर सम्मेलन की औपचारिक बैठकों से ठीक पहले या उसी दौरान दोनों नेता इस मेगा डिफेंस डील को लेकर आम सहमति बनाने का प्रयास करेंगे। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि दोनों देशों के बीच पारंपरिक रूप से मजबूत रहे रक्षा संबंधों को यह संभावित समझौता और अधिक ऊंचाई पर ले जा सकता है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर कई प्रकार के भू-राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हालाँकि इस प्रस्तावित अनुबंध को लेकर अभी तक दोनों सरकारों की ओर से कोई आधिकारिक और अंतिम मुहर नहीं लगाई गई है, लेकिन सैन्य हलकों में इसकी चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। लखनऊ समेत देश भर के रक्षा प्रेमियों और रणनीतिक जानकारों की नजरें इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात पर टिकी हुई हैं। यदि यह सौदा तय हो जाता है, तो इससे न केवल दोनों देशों के आपसी सामरिक संबंध प्रगाढ़ होंगे, बल्कि भारतीय वायुसेना को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की तकनीक हासिल करने में भी अभूतपूर्व बढ़त मिलेगी। आने वाले दिनों में इस दिशा में और अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।
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