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रक्षा और सुरक्षा

टैंक हंटर की एंट्री: अमेरिका के साथ हुए रक्षा समझौते के तहत भारत आ रही है खतरनाक जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाया गया है, जिसके तहत भारतीय सैन्य बेड़े को मजबूत करने के लिए घातक 'टैंक हंटर' यानी जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइलों की आपूर्ति जल्द होने जा रही है।

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Ankit Yadav
30 अग 2026, 12:23
टैंक हंटर की एंट्री: अमेरिका के साथ हुए रक्षा समझौते के तहत भारत आ रही है खतरनाक जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल
भारतीय रक्षा क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर और अधिक उन्नत बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। प्राप्त जानकारियों के अनुसार, भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग के अंतर्गत एक अहम समझौता हुआ है, जिसके तहत अत्याधुनिक जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें भारत पहुंच रही हैं। इन हथियारों को उनकी अचूक मारक क्षमता और दुश्मनों के बख्तरबंद वाहनों को पलक झपकते ही नेस्तनाबूद करने की कला के कारण 'टैंक हंटर' के नाम से भी जाना जाता है। इस सैन्य समझौते से देश की सामरिक ताकत में जबरदस्त इजाफा होने की पूरी उम्मीद है।

रणनीतिक महत्व और सुरक्षा तैयारियां

आधुनिक युद्धक क्षेत्रों में टैंकों और भारी वाहनों को रोकना किसी भी थल सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना जाता है। ऐसे में इस अमेरिकी डिफेंस डील के जरिए जैवलिन जैसी विश्वस्तरीय मिसाइलों का भारतीय शस्त्रागार में शामिल होना बेहद अहम साबित होगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन पोर्टेबल और अत्यधिक प्रभावी मिसाइलों के मिलने से मोर्चे पर तैनात हमारे जवानों की आक्रामक और रक्षात्मक दोनों ही क्षमताएं कई गुना बढ़ जाएंगी। देश की सीमाओं पर बदल रहे सुरक्षा समीकरणों के बीच इस प्रकार के हथियारों का अधिग्रहण सामरिक संतुलन बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है। इस रक्षा सौदे की सुगबुगाहट के बाद से ही वैश्विक रक्षा गलियारों में खासी चर्चा है और रणनीतिक विश्लेषक इस कदम को भारत और अमेरिका के बीच लगातार प्रगाढ़ होते सामरिक रिश्तों का परिणाम बता रहे हैं। वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान और संयुक्त उत्पादन तथा खरीद को लेकर कई बड़े समझौते हुए हैं। जैवलिन मिसाइलों की यह खेप उसी व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक जीवंत उदाहरण है, जो दोनों देशों को क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के मोर्चे पर एक ही पाले में लाकर खड़ा करती है। आने वाले दिनों में इन अत्याधुनिक हथियारों को भारतीय थल सेना के विभिन्न सामरिक मोर्चों पर तैनात किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इन हथियारों के संचालन और रखरखाव के लिए सैनिकों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि युद्धक मैदान में इनका अधिकतम और सटीक उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया के धरातल पर उतरने से भारतीय रक्षा बलों की मारक क्षमता में मील का पत्थर साबित होने वाला बदलाव आएगा, जिससे देश विरोधी ताकतों के मन में खौफ पैदा होना तय माना जा रहा है।
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