मिसाइल परीक्षण के लिए भारत के स्थलों का चयन
जापान अपनी सैन्य तैयारियों को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से भारत के मिसाइल परीक्षण स्थलों को इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। इस संदर्भ में जापानी रक्षा अधिकारियों का एक समूह इस महीने की शुरुआत में भारत आया था। अधिकारियों ने लगभग सात दिनों तक देश की विभिन्न मिसाइल रेंजों का बारीकी से निरीक्षण किया है। मुख्य रूप से टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइलों का परीक्षण करने के लिए उपयुक्त और सुरक्षित स्थानों की तलाश की जा रही है। इन हथियारों की मारक क्षमता करीब एक हजार किलोमीटर तक है, जिसे जापान के भीतर पूरी तरह से जांचना चुनौतीपूर्ण कार्य है। जापान के घनी आबादी वाले इलाकों और कड़े सुरक्षा नियमों के कारण वहां ऐसी लंबी दूरी वाली मिसाइलों का सुरक्षित परीक्षण कर पाना बेहद मुश्किल होता है। इसलिए, भारत की विस्तृत और कम आबादी वाली मिसाइल रेंज जापान की रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक बेहतर विकल्प के रूप में देखी जा रही है। यह सहयोग जापान को वास्तविक सामरिक परिस्थितियों में अपने नए हथियारों की क्षमता परखने का अवसर प्रदान करेगा।
ड्रोन प्रणाली और तकनीक का तकनीकी समन्वय
जापान केवल लंबी दूरी की मिसाइलों तक ही सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह अपनी तटीय रक्षा प्रणाली को भी आधुनिक बना रहा है। इसके तहत पानी के भीतर, सतह पर और हवा में काम करने वाले कई मानव रहित ड्रोन शामिल किए जा रहे हैं। इन्हें एकीकृत करने के लिए एक विशेष हाइब्रिड शील्ड प्रणाली विकसित की जा रही है, जो टोही और हमले दोनों कार्यों में सक्षम होगी। ये ड्रोन दुश्मन की सीमा से बाहर से मार करने वाली मिसाइलों के साथ मिलकर प्रभावी तरीके से कार्य करेंगे। जापान के भीतर इन छोटे हमलावर ड्रोनों का प्रशिक्षण आयोजित करना मुश्किल है, क्योंकि रेडियो फ्रीक्वेंसी के कारण नागरिक संचार व्यवस्था और स्मार्टफोन पर बुरा असर पड़ सकता है। सुरक्षा संबंधी कई अन्य जटिलताओं के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन से तालमेल बैठाना भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। भारत की विशाल रेंज में परीक्षण करने से जापान को इन बाधाओं को पार करने और अपने ड्रोन सिस्टम को बेहतर ढंग से जांचने में मदद मिलेगी। इस दौरान परीक्षण नियमों में लचीलापन भी जापान के लिए सहायक साबित हो सकता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की रक्षा रणनीतियां
जापान अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ऑस्ट्रेलिया के साथ भी मिसाइल परीक्षण के क्षेत्रों में लगातार काम कर रहा है। अगस्त माह में जापानी रक्षा मंत्री शिन्जिरो कोइजुमी और ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने इस दिशा में महत्वपूर्ण वार्ता की है। वर्ष 2023 से ही जापान ने ऑस्ट्रेलिया में सैन्य अभ्यास के दौरान अपनी एंटी-शिप मिसाइलें तैनात की हैं और पिछले साल और भी जटिल लॉन्च किए गए थे। हाइपरसोनिक जैसी उन्नत स्टैंडऑफ मिसाइलों का परीक्षण करने की योजना दोनों देशों के बीच भविष्य के रक्षा संबंधों की गहराई को दर्शाती है। यह पूरा कदम चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और उत्तर कोरिया के परमाणु मिसाइल शस्त्रागार के जवाब में अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का हिस्सा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगी देशों के साथ मिलकर जापान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए नई नीतियां बना रहा है। इन द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से जापान न केवल अपनी नई मिसाइलें विकसित करेगा, बल्कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए एक मजबूत सुरक्षा घेरा भी तैयार करेगा। हालांकि, इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय आने वाले समय में लिए जाएंगे।