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अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में उछाल: EY-CII रिपोर्ट के मुताबिक अगले दशक में 44 अरब डॉलर तक पहुंचेगा भारत का स्पेस सेक्टर

भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था आने वाले दशक में जबरदस्त विस्तार के लिए तैयार है। एक ताजा EY-CII रिपोर्ट के अनुसार, इस सेक्टर के 44 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।

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Ankit Yadav
15 सित 2026, 13:52
अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में उछाल: EY-CII रिपोर्ट के मुताबिक अगले दशक में 44 अरब डॉलर तक पहुंचेगा भारत का स्पेस सेक्टर
भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान अभूतपूर्व प्रगति देखने को मिली है। तकनीकी नवाचार और सरकारी नीतियों में बदलाव के कारण अंतरिक्ष बाजार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। EY और भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा जारी की गई एक नई रिपोर्ट में इस बात का अनुमान लगाया गया है कि आने वाले दशक के भीतर देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का आकार बढ़कर 44 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। यह वृद्धि देश के भीतर वैज्ञानिक अनुसंधान, व्यावसायिक उपग्रह प्रक्षेपण और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं की बढ़ती मांग को दर्शाती है।

अंतरिक्ष बाजार का बढ़ता दायरा और निवेश

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो की सफलताओं और देश में निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के प्रवेश ने पूरे परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। सरकार द्वारा इस क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के बाद से निवेशकों का भरोसा भी काफी मजबूत हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में उपग्रह विनिर्माण, लॉन्च सेवाओं, ग्राउंड सिस्टम और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भारी निवेश आने की पूरी संभावना है। इससे न केवल देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। देश की अंतरिक्ष नीतियां अब वैश्विक स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बना रही हैं। कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले अंतरिक्ष मिशन लॉन्च करने की भारत की क्षमता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों और कंपनियों का ध्यान आकर्षित किया है। आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी में और अधिक वृद्धि होने की उम्मीद है। अंतरिक्ष उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही गति बनी रही, तो निर्धारित समय सीमा से पहले ही यह आर्थिक लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

भविष्य की योजनाएं और आर्थिक प्रभाव

आने वाले दशक में अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग कृषि, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, दूरसञ्चार और नौवहन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में और अधिक व्यापक रूप से किया जाएगा। इससे देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के विस्तार से देश की जीडीपी में भी एक महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। EY-CII की इस रिपोर्ट ने उद्योग जगत के दिग्गजों और नीति निर्माताओं के सामने विकास की एक नई रूपरेखा पेश कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में और अधिक कड़े और परिणामोन्मुखी कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
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