पुतिन आ गए, कल पहुंचेंगे चिनफिंग... BRICS समिट में क्या-क्या होगा? मिनट-टू-मिनट पूरा शेड्यूल
भारत-रूस दोस्ती की नई दास्तां, BRICS समिट से पहले ही होने जा रही बड़ी डील; बदल जाएगी क्षेत्रीय विमानन की दुनिया?
BRICS रवाना होते ही ईरान ने ट्रंप को चिढ़ाया, भारत की तारीफ कर बोला- डॉलर पर...
CJP ने लुधियाना के 3 स्कूलों की गिनाई कमियां, केजरीवाल बोले, हम तुरंत...
'तुम लेकर आओ, हम अपनी पार्टी में…’, मायावती के भतीजे आकाश पर अखिलेश का बड़ा ऑफर
नेपाल में बाढ़ से तबाही, ₹45 हजार करोड़ लगेंगे: यह देश की GDP का 11%; बाढ़ से 16 लाख लोग प्रभावित, 1377 की ...
BRICS समिट पर कांग्रेस में मतभेद: चिदंबरम ने पूछा- देश को क्या मिला; थरूर बोले- 11 देश के नेताओं को एक मंच ...
चलती मुंबई लोकल से गिरी महिला, खचाखच भरी ट्रेन का वीडियो देख सुरक्षा उठे पर सवाल
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
बैंकों में सन्नाटा: देशव्यापी हड़ताल और ब्रिक्स सम्मेलन के बीच वित्तीय सेवाएं ठप
देशभर के बैंकिंग कर्मचारी आज एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर हैं, जिसके चलते वित्तीय कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिक्स सम्मेलन के आयोजन के बीच इस बड़े विरोध प्रदर्शन से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
A
Ankit Yadav
11 सित 2026, 12:48
आज भारत भर में बैंकों के कर्मचारी और अधिकारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर चले गए हैं। इस विरोध प्रदर्शन के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं में कामकाज पूरी तरह से थम गया है, जिससे नकदी निकासी, जमा और चेक समाशोधन जैसी बुनियादी वित्तीय सेवाएं बाधित हुई हैं। हड़ताल का यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देश में अंतरराष्ट्रीय महत्व का ब्रिक्स सम्मेलन भी चल रहा है। इस स्थिति ने सरकार और वित्तीय संस्थानों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है, क्योंकि एक तरफ वैश्विक स्तर पर बड़े कूटनीतिक आयोजन हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ घरेलू मोर्चे पर कर्मचारी संगठन अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।
लखनऊ और उत्तर प्रदेश में दिखा हड़ताल का असर
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत राज्य के तमाम जिलों में इस देशव्यापी बैंक हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। लखनऊ के हजरतगंज और विधान भवन के आसपास स्थित प्रमुख बैंकों की शाखाओं के बाहर सन्नाटा पसरा हुआ है, और कर्मचारी संघों ने प्रदर्शन तेज कर दिए हैं। स्थानीय ग्राहकों को यह उम्मीद थी कि शायद कुछ काउंटर खुले मिलेंगे, लेकिन ताले लटके होने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। एटीएम मशीनों पर भी ग्राहकों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, क्योंकि लोग नगद राशि प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बैंक यूनियनों के नेताओं का कहना है कि उनकी अनदेखी लंबे समय से की जा रही थी, जिसके चलते उन्हें इस कड़े कदम को उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
ब्रिक्स सम्मेलन जैसे बड़े कूटनीतिक आयोजन के बीच इस प्रकार की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का होना देश की आर्थिक गतिविधियों पर गहरा प्रभाव डालता है। विदेशी मेहमानों और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का ध्यान आकर्षित करने वाले इस सम्मेलन के साए में बैंकिंग व्यवस्था का ठप होना एक बड़ा विषय बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के प्रदर्शन सरकार पर दबाव बनाने में तो सफल होते हैं, परंतु इनका तात्कालिक असर आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों पर पड़ता है जिन्हें दैनिक लेनदेन के लिए नकदी की आवश्यकता होती है। व्यापारिक संगठनों ने भी चिंता जताई है कि यदि यह हड़ताल लंबी चली तो अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में सुस्ती आ सकती है।
बैंक प्रबंधन और संबंधित मंत्रालयों के बीच सुलह के प्रयास अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सके हैं। कर्मचारी संगठनों की मुख्य मांगों में वेतन संशोधन, कार्य स्थितियों में सुधार और निजीकरण की नीतियों का विरोध शामिल है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन किसी न किसी रूप में जारी रहेगा। आने वाले दिनों में यदि वार्ता का दौर विफल रहता है, तो यूनियनों द्वारा आंदोलन को और अधिक तीव्र करने की चेतावनी भी दी गई है, जिससे आने वाले सप्ताहों में वित्तीय बाजारों में और अधिक हलचल देखने को मिल सकती है।