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बड़ी गुहार: पाकिस्तान से आए 100 साल के स्वतंत्रता सेनानी को मिला सम्मान और नेम प्लेट, लेकिन अब तक नहीं मिली पेंशन

पाकिस्तान से भारत आकर रहने वाले एक सौ वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी ने प्रशासन के सामने गुहार लगाई है कि उन्हें आधिकारिक पहचान और सम्मान तो मिल गया है, लेकिन उनके हिस्से की पेंशन अभी तक शुरू नहीं हो सकी है।

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Ankit Yadav
11 सित 2026, 14:24
बड़ी गुहार: पाकिस्तान से आए 100 साल के स्वतंत्रता सेनानी को मिला सम्मान और नेम प्लेट, लेकिन अब तक नहीं मिली पेंशन
देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाने वाले बुजुर्ग सेनानियों को आज भी कई बार प्रशासनिक जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। ताजा मामला एक ऐसे शताब्दी पार कर चुके स्वतंत्रता सेनानी का है, जो पड़ोसी देश पाकिस्तान से पलायन कर भारत आए थे। उन्हें समाज और स्थानीय स्तर पर पूरा सम्मान मिला है, उनके आवास के बाहर आधिकारिक नेम प्लेट भी लगाई गई है, जिससे यह जाहिर होता है कि वह देश के लिए लड़ने वाले महान सेनानी हैं। इसके बावजूद, उन्हें अभी तक अपनी वैध पेंशन का लाभ नहीं मिल पाया है, जिसके चलते उनका जीवन संघर्षपूर्ण बना हुआ है।

अधिकारियों की उदासीनता और बढ़ती उम्र की मुश्किलें

इस बुजुर्ग सेनानी की आयु अब सौ वर्ष हो चुकी है, इस पड़ाव पर उन्हें वित्तीय सहायता और चिकित्सा देखभाल की सबसे अधिक आवश्यकता है। कागजी कार्रवाई और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की इस उम्र में उनके लिए यह प्रक्रिया बेहद थकाऊ हो गई है। हालांकि उनके घर के बाहर सम्मानस्वरूप नेम प्लेट जरूर लगा दी गई है, जो उनके योगदान को बयां करती है, लेकिन केवल प्रतीकात्मक सम्मान से दैनिक जीवन की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो सकतीं। पेंशन रुकने के कारण उन्हें लगातार आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, और उन्होंने अपनी इस पीड़ा को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करते हुए मदद की गुहार लगाई है। आजादी की लड़ाई में योगदान देने वाले सेनानियों के लिए सरकार की ओर से विशेष पेंशन योजनाएं चलाई जाती हैं, ताकि उनका बुढ़ापा सम्मानजनक तरीके से बीते। लेकिन कई बार वेरिफिकेशन या दस्तावेजों की कमी जैसी तकनीकी अड़चनों के कारण ऐसे मामले सालों तक लटके रहते हैं। इस मामले में भी प्रशासनिक सुस्ती और नियमों के जाल के कारण बुजुर्ग को उनका हक मिलने में भारी देरी हो रही है। देश के विभिन्न हिस्सों से अक्सर ऐसी खबरें सामने आती हैं जहां स्वतंत्रता सेनानी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते नजर आते हैं, जो हमारी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

जनता और सोशल मीडिया पर बढ़ती प्रतिक्रियाएं

जैसे ही इस सौ वर्षीय सेनानी की व्यथा सामने आई, आम जनता और विभिन्न संगठनों के बीच इस पर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। लोग सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जता रहे हैं और जल्द से जल्द पेंशन बहाल करने की मांग कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में जिला प्रशासन को स्वतः संज्ञान लेकर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए ताकि स्वतंत्रता सेनानियों को उनके जीवन के अंतिम दिनों में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उम्मीद की जा रही है कि मीडिया रिपोर्ट्स और इस सार्वजनिक गुहार के बाद अब राज्य और केंद्र सरकार के संबंधित विभाग हरकत में आएंगे। कागजी औपचारिकताओं को तेजी से पूरा कर इस शताब्दी पार कर चुके योद्धा की पेंशन जल्द से जल्द शुरू किए जाने की संभावना है, ताकि उन्हें वह आर्थिक सुरक्षा मिल सके जिसके वे वास्तव में हकदार हैं।
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