'अरुणाचल बॉर्डर पर भारत और चीन आमने-सामने बने हुए हैं', आईटीबीपी डीजी के बयान पर सियासत गरमाई
सिवान में पटाखा कारोबारी के घर में ब्लास्ट; 7 की मौत की सूचना, 2 घंटे तक होते रहे धमाके
ईरान पर कहर बरपाने को तैयार था इजरायल, मगर ट्रंप ने रोक दिया; किस शर्त पर माने नेतन्याहू
दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की नेहा बोरा की याचिका, 'पीस बॉन्ड' भरने के खिलाफ की थी अपील
PHOTOS: बंगाल की खाड़ी में फिर जागा समुद्री राक्षस, सबको निगलने के लिए है बेताब, IMD ने बताया कब बरपाएगा कह...
राहुल गांधी पर पीएम मोदी के लगातार हमले लेकिन नेहा बोरा-दीपके पर चुप्पी के क्या मायने हैं
MLC Election Live: यूपी में मतदान सुस्त, पटना मे अनंत सिंह के समर्थकों ने की आतिशबाजी, 4 राज्यों में मतदान संपन्न
अमिताभ बच्चन का बंगला उड़ाने की धमकी: दिलजीत दोसांझ को जान से मारने का मेल; 5 दिन पहले टाइगर श्रॉफ पर हुई थ...
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
भरोसे का संकट: अमेरिका और कनाडा में रखे अपने सोने को वापस मंगा रहे हैं यूरोपीय देश
वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय अनिश्चितता के बीच, यूरोपीय देशों ने अमेरिका और कनाडा की तिजोरी में सुरक्षित रखे अपने स्वर्ण भंडार को वापस अपने देश लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
A
Ankit Yadav
06 सित 2026, 17:07
वैश्विक अर्थव्यवस्था में इन दिनों एक अजीब सा अविश्वास और हलचल का माहौल बना हुआ है, जिसके चलते दुनिया भर के कई ताकतवर देश अपनी रणनीतिक संपत्तियों को लेकर बेहद सतर्क हो गए हैं। ताजा खबरों के अनुसार, यूरोपीय देशों ने उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप यानी अमेरिका और कनाडा के सुरक्षित भंडारों में रखे अपने बेशकीमती सोने को वापस अपने वतन बुलाना शुरू कर दिया है। दशकों से कई राष्ट्र अपने केंद्रीय बैंकों का स्वर्ण भंडार विदेशी धरती पर स्थित तिजोरियों में संभाल कर रखते थे, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और संकट के समय मदद मिल सके। लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और बदलते कूटनीतिक समीकरणों के कारण अब इन सरकारों की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
वैश्विक स्तर पर गहराता अविश्वास
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम के पीछे प्रमुख कारण पश्चिमी देशों के आपसी संबंधों में आ रही दरार और भविष्य की आर्थिक अनिश्चितताएं हैं। पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से रूस की विदेशी संपत्तियों को फ्रीज किया गया है, उसने कई देशों की नींद उड़ा दी है। यूरोपीय देशों को अब यह डर सताने लगा है कि यदि भविष्य में उनके राजनीतिक संबंध उत्तरी अमेरिका के साथ बिगड़ते हैं, तो उनकी विदेशी तिजोरियों में रखा सोना भी संकट में पड़ सकता है। अपनी संप्रभुता और आर्थिक सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, अब इन राष्ट्रों ने अपनी संपत्तियों को अपने घरेलू नियंत्रण में लाने का कड़ा फैसला किया है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
घरेलू तिजोरियों में सोने की वापसी के मायने
सोने के इस बड़े पैमाने पर हो रहे स्थानांतरण से वैश्विक वित्तीय बाजार और बैंकिंग सेक्टर पर भी गहरा असर पड़ रहा है। ऐतिहासिक रूप से, लंदन, न्यूयॉर्क और ओटावा जैसे वित्तीय केंद्र दुनिया भर के सोने के सुरक्षित भंडारण के लिए प्रमुख ठिकाने माने जाते रहे हैं। हालांकि, अब यूरोपीय केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनी परिसंपत्तियों की रीलोकेशन करने से इन पारंपरिक व्यवस्थाओं को चुनौती मिल रही है। यह प्रवृत्ति सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वैश्विक वित्तीय प्रणाली में अब भरोसे की भारी कमी पैदा हो गई है। देश अब बाहरी सुरक्षा प्रणालियों की बजाय अपनी खुद की सीमाओं के भीतर अपनी आर्थिक संपत्तियों को सुरक्षित रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
आने वाले दिनों में इस तरह की गतिविधियां अन्य देशों के लिए भी एक मिसाल बन सकती हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर स्वर्ण भंडार के प्रबंधन और भंडारण की पुरानी नीतियां पूरी तरह बदल सकती हैं। जैसे-जैसे भू-राजनीतिक तनाव गहराते जाएंगे, देशों का अपनी संपत्ति पर कड़ा नियंत्रण रखने का रुझान और अधिक तेजी से बढ़ेगा, जो आने वाले अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे के भविष्य की एक नई तस्वीर पेश कर रहा है।