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भू-राजनीति: दो दशकों बाद इराक के शेष सैन्य ठिकानों को खाली करेगा अमेरिका, पश्चिम एशिया में नए समीकरण

अमेरिकी सेना दो दशक से अधिक समय की मौजूदगी के बाद इराक में अपने शेष सैन्य ठिकानों को पूरी तरह खाली करने की तैयारी में है। वाशिंगटन और बगदाद के बीच हुए रणनीतिक समझौते के तहत यह वापसी तय समयसीमा में पूरी की जाएगी जिससे क्षेत्रीय राजनीति में बदलाव तय माना जा रहा है।

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Ankit Yadav
30 सित 2026, 11:56
भू-राजनीति: दो दशकों बाद इराक के शेष सैन्य ठिकानों को खाली करेगा अमेरिका, पश्चिम एशिया में नए समीकरण

सैन्य वापसी का चरणबद्ध खाका

अमेरिकी रक्षा विभाग और इराकी सरकार के बीच संपन्न उच्चस्तरीय वार्ताओं के बाद इस समझौते पर मुहर लगाई गई है। समझौते के अनुसार पहले चरण में पश्चिमी इराक के प्रमुख एयरबेस खाली किए जाएंगे और सुरक्षा की कमान इराकी सुरक्षा बलों को सौंपी जाएगी। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार 2003 के आक्रमण के बाद से अमेरिकी सेना की यह सबसे निर्णायक वापसी मानी जा रही है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रभाव का बदलता संतुलन

इस सैन्य वापसी के चलते पश्चिम एशिया के राजनीतिक संतुलन में महत्वपूर्ण बदलाव आने की संभावना है। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी सैनिकों के हटने से ईरान के रणनीतिक प्रभाव में बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि कुछ रक्षा विशेषज्ञों ने इस्लामिक स्टेट के दोबारा सिर उठाने के खतरे के प्रति भी आगाह किया है। इराकी सरकार ने आश्वस्त किया है कि उसकी अपनी सशस्त्र सेना देश की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है।

वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

इस वापसी के संकेतों के बीच पश्चिम एशिया के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं जताई जा रही हैं। वैश्विक तेल बाजारों ने इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर सतर्क रुख अपनाया है। विभिन्न पश्चिमी देशों ने इराक के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग को जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

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