थाने में दर्ज कराई गई गंभीर प्राथमिकी
रांची जिले के छोटा घाघरा इलाके की निवासी रतना कच्छप ने एयरपोर्ट थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उनकी बेटी मोनिका को रोजगार के बहाने संयुक्त अरब अमीरात भेजा गया था लेकिन वहां पहुंचते ही उसे गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इस मामले में प्रियंका, रितेश, मोहम्मद मेराज अंसारी और आमेड ट्रेंड के मैनेजर को आरोपी बनाया गया है। रतना कच्छप ने देश के विदेश मंत्रालय से संपर्क साधकर अपनी पुत्री को दुबई से सकुशल वापस अपने वतन लाने की गुहार लगाई है। पुलिस ने परिवार की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार मोनिका की ऑनलाइन माध्यम से एएमडी ट्रेंड सॉल्युशन से जुड़े एक एजेंट से बातचीत हुई थी। एजेंटों ने विदेश में बेहतरीन नौकरी के साथ साथ भोजन और रहने के लिए आवास उपलब्ध कराने का ठोस भरोसा दिया था। इसी भरोसे के झांसे में आकर मोनिका के परिवार ने आरोपियों की बात पर विश्वास किया और प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। एजेंटों की ओर से टिकट के नाम पर पैसे की मांग की गई थी जिसे फोन पे के जरिए ट्रांसफर किया गया था।
दिल्ली से शारजाह पहुंचने के बाद छीना पासपोर्ट
मोटी रकम और टिकट के पैसे देने के बाद मोनिका पांच मई को दिल्ली एयरपोर्ट से रवाना होकर शारजाह पहुंची। शारजाह हवाई अड्डे पर उतरते ही एजेंसी की तरफ से आए एक कार चालक ने फौरन उसका पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया। इसके ठीक अगले दिन उसे अजमान के बैंड मील इलाके में चौबीसवें फ्लोर पर स्थित एक कार्यालय में ले जाया गया। रितेश और मोहम्मद मेराज अंसारी नामक व्यक्तियों पर आरोप है कि उन्होंने मोनिका पर अनुचित दबाव बनाया। आरोपियों ने उसे डरा धमकाकर अरबी भाषा में लिखे हुए कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान जबरन ले लिए। इसके अलावा उसका मोबाइल फोन भी छीन लिया गया ताकि वह परिवार से संपर्क न कर सके। व्हाट्सएप पर प्रियंका के साथ हुई उसकी सारी बातचीत को भी कथित तौर पर पूरी तरह डिलीट कर दिया गया। बाद में वीडियो कॉल के जरिए उसकी किसी अनजान व्यक्ति से बात कराई गई और उस पर बड़ा कर्ज लाद दिया गया। मोनिका को यह कहकर धमकाया गया कि उसने बारह हजार छह सौ दिरहम का लोन लिया है। उसे चेतावनी दी गई कि पच्चीस मई तक यह रकम नहीं चुकाने पर उसे जेल भेज दिया जाएगा। भाषा की अड़चन के कारण उसे बार-बार अलग अलग जगहों पर घरेलू कामों के लिए भेजा जाने लगा।
भाषा की समस्या और मानसिक प्रताड़ना का दौर
लगभग एक महीने तक अलग रखने के बाद बाइस जून को उसे बिना वर्क परमिट के एक बुजुर्ग की देखभाल के लिए भेजा गया। अरबी भाषा की जानकारी नहीं होने के कारण वह वहां टिक नहीं सकी और अगले दिन उसे वापस कार्यालय लाया गया। इसके बाद एक जुलाई और सोलह जुलाई को भी उसे विभिन्न घरों में घरेलू कामकाज के लिए भेजा गया। परिवार का कहना है कि भाषा न जानने के कारण उसे लगातार मानसिक परेशानी और गंभीर प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। मोनिका को मोहम्मद मेराज अंसारी के घर भी रखा गया जहां उससे लगातार झाड़ू पोंछा और बर्तन साफ करवाए जाते थे। वॉशरूम की सफाई जैसे काम कराने के साथ साथ उसे शारीरिक और मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया जाने लगा। जब मोनिका ने अपनी बीमार मां का हवाला देकर भारत लौटने की इच्छा जताई तो मेराज अंसारी ने उसके साथ गाली गलौज की। उसे धमकाते हुए कहा गया कि कंपनी के खाते में मोटी रकम जमा किए बिना उसे किसी भी सूरत में नहीं जाने दिया जाएगा। साथ ही यह धमकी भी दी गई कि वह दुबई में ही फंस जाएगी और उसे कोई दूसरा काम भी नहीं मिलेगा। इन तमाम मुश्किलों से जूझते हुए परिवार ने अब सरकार से मदद की आस लगाई है।