रीढ़ की बिगड़ती सेहत का संकट
आज 16 अक्टूबर 2026 को विश्व स्पाइन दिवस के रूप में मनाया जा रहा है, जिसका मुख्य विषय 'जीवन भर के लिए रीढ़ का स्वास्थ्य' है। कुशीनगर के मेडिकल कॉलेज स्थित हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले हर दूसरे मरीज में रीढ़ की हड्डी से संबंधित विकार देखे जा रहे हैं। अस्पताल में पहुंचने वाले कुल मरीजों की संख्या में 50 फीसदी से अधिक लोग कमर और गर्दन के दर्द से परेशान हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि डिजिटल युग की जीवनशैली का सीधा प्रभाव मानव शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग रीढ़ पर पड़ रहा है। पहले यह माना जाता था कि रीढ़ या कमर की तकलीफें उम्र बढ़ने के साथ आती हैं, लेकिन अब कम उम्र के युवा और विद्यार्थी भी अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं। लैपटॉप के सामने लगातार बैठने और मोबाइल पर घंटों समय बिताने से युवाओं की मांसपेशियों और हड्डियों पर भारी दबाव बढ़ रहा है, जिससे गर्दन की अकड़न और कमर दर्द जैसे मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।
विशेषज्ञों की सलाह और सावधानियां
हड्डी रोग विशेषज्ञ एमएच खान और गजेंद्र शर्मा ने रीढ़ को सुरक्षित रखने के लिए कड़े सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से बचना अनिवार्य है। जो लोग कंप्यूटर पर काम करते हैं या लंबे समय तक बाइक चलाते हैं, उन्हें बीच-बीच में छोटा ब्रेक जरूर लेना चाहिए। निर्माण कार्य में लगे मजदूर या खेतों में झुककर काम करने वाले किसानों को भी अपनी कार्यशैली में सुधार करने की आवश्यकता है। बहुत से लोग दर्द शुरू होने पर खुद ही दवाएं ले लेते हैं या मालिश जैसे घरेलू उपाय करते हैं, जो घातक हो सकता है। यदि दर्द लगातार बना रहे या हाथ-पैर में सुन्नपन महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। विशेष रूप से मल-मूत्र पर नियंत्रण की समस्या या पैरों में कमजोरी महसूस होना किसी बड़ी बीमारी के संकेत हो सकते हैं, जिसे नजरअंदाज करना नुकसानदेह साबित हो सकता है। गलत तरीके से भारी वजन उठाना भी इन समस्याओं को गंभीर बना रहा है।
जीवनशैली में सुधार का महत्व
स्वस्थ रीढ़ को बनाए रखने के लिए रोजाना शारीरिक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पैदल चलना और अपनी क्षमता के अनुरूप व्यायाम करना पीठ की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है। मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग के दौरान शरीर को झुकाकर बैठने की आदत से बचना चाहिए क्योंकि यह गर्दन और रीढ़ के जोड़ों के लिए हानिकारक है। सही तरीके से खड़े होने, बैठने और वजन उठाने के मानकों का पालन करने से भविष्य में आने वाली रीढ़ की गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि रीढ़ की सेहत को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। लगातार दर्द बना रहना कोई सामान्य बात नहीं है, बल्कि यह शरीर की ओर से मिलने वाली चेतावनी है। यदि हम अपनी दिनचर्या में बदलाव नहीं लाते हैं और शारीरिक आराम की कमी को पूरा नहीं करते हैं, तो यह समस्या उम्र भर के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।