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धार्मिक नियम: गणेश चतुर्थी पर बप्पा को क्यों नहीं चढ़ाई जाती तुलसी दल और क्या है इसके पीछे का पौराणिक श्राप

गणेश चतुर्थी 2026 के पावन अवसर पर आइए जानते हैं उस पौराणिक कथा और श्राप के बारे में जिसके चलते भगवान गणेश की पूजा में कभी भी तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

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Ankit Yadav
14 सित 2026, 11:42
धार्मिक नियम: गणेश चतुर्थी पर बप्पा को क्यों नहीं चढ़ाई जाती तुलसी दल और क्या है इसके पीछे का पौराणिक श्राप
सनातन धर्म में गणेश चतुर्थी का त्योहार बहुत ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान देश भर के विभिन्न पंडालों और घरों में विघ्नहर्ता गणेश की मूर्ति स्थापित की जाती है और उनकी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तथा अयोध्या समेत कई प्रमुख धार्मिक स्थलों और उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में इस पर्व को लेकर गजब का उत्साह देखने को मिलता है। भक्तगण भगवान को उनकी मनपसंद चीजें जैसे मोदक और लड्डू अर्पित करते हैं, लेकिन एक ऐसी वस्तु है जिसे भगवान गणेश की पूजा में पूरी तरह वर्जित माना गया है, और वह है तुलसी का पत्ता।

तुलसी दल वर्जित होने की पौराणिक कथा

उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में सनातन संस्कृति के जानकारों के अनुसार, भगवान गणेश को तुलसी दल न चढ़ाने के पीछे एक बेहद दिलचस्प पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। कथा के अनुसार, एक बार मां तुलसी भगवान गणेश के रूप पर मोहित हो गईं और उन्होंने उनके समक्ष विवाह का प्रस्ताव रख दिया। हालांकि, भगवान गणेश ने बाल ब्रह्मचारी होने का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को विनम्रता से अस्वीकार कर दिया। अपनी इस अस्वीकृति से आहत होकर मां तुलसी ने आवेश में आकर भगवान गणेश को दो विवाह होने का श्राप दे दिया।

क्रोधित होकर गणेश जी ने दिया था श्राप

तुलसी जी द्वारा दिए गए श्राप के प्रतिउत्तर में भगवान गणेश भी क्रोधित हो गए और उन्होंने भी तुलसी को यह श्राप दे दिया कि उनका विवाह एक असुर से होगा। जब तुलसी जी को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने क्षमा मांगी, तो गणेश जी ने शांत होकर कहा कि भविष्य में तुम्हारा विवाह शंखच्रूड नामक राक्षस से होगा, लेकिन तुम भगवान विष्णु और कृष्ण को अत्यंत प्रिय रहोगी। हालांकि, गणेश पूजा में तुलसी का पत्ता वर्जित ही रहेगा। यही कारण है कि आज भी गणेश चतुर्थी या किसी भी अन्य गणेश पूजन के दौरान बप्पा को तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता है। भक्तगण भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए दूर्वा घास, मोदक, और लाल फूल अर्पित करते हैं, जिसे बहुत शुभ माना जाता है। उत्तर प्रदेश, लखनऊ और अयोध्या जैसे पवित्र नगरों में इन दिनों गणेश उत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला जारी है। इन नियमों का पालन करते हुए श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ विघ्नहर्ता की आराधना कर रहे हैं ताकि उनके जीवन से सभी संकट दूर हो सकें और सुख-समृद्धि का वास हो सके।
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