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धर्म

ऋषि पंचमी व्रत: जानिए सप्तऋषियों की पूजा का महत्व और पौराणिक कथा

ऋषि पंचमी के पावन पर्व पर सप्तऋषियों की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। आइए जानते हैं इसके पीछे छिपी पौराणिक कथा और पूजन विधि के बारे में विस्तार से।

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Ankit Yadav
15 सित 2026, 17:46
ऋषि पंचमी व्रत: जानिए सप्तऋषियों की पूजा का महत्व और पौराणिक कथा
सनातन धर्म में ऋषि पंचमी का व्रत और पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस विशेष दिन पर देश भर में श्रद्धालु सप्तऋषियों की उपासना करते हैं और उनके द्वारा मानवता के कल्याण के लिए किए गए महान कार्यों को याद करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत मुख्य रूप से जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति पाने और जीवन में शुद्धि लाने के लिए रखा जाता है। इस दिन का अनुष्ठान करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग भी प्रशस्त होते हैं।

सप्तऋषियों की पूजा का धार्मिक महत्व

ऋषि पंचमी के दिन कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ इन सातों महान ऋषियों का पूजन किया जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक, इन ऋषियों ने वेदों के प्रसार और सृष्टि के संचालन में अहम भूमिका निभाई थी। सनातन परंपरा में गुरुओं और ऋषियों का स्थान भगवान से भी ऊंचा माना गया है, क्योंकि उन्होंने ही समाज को ज्ञान, सभ्यता और धर्म का सही मार्ग दिखाया। इस पर्व के माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर से जुड़ती है और महान ऋषियों के योगदान का स्मरण करती है। पौराणिक कथाओं में इस व्रत के पीछे कई कथाओं का उल्लेख मिलता है, जिनमें मुख्य रूप से मनुष्यों द्वारा अनजाने में किए गए पाप कर्मों के प्रायश्चित से जुड़ी कथा शामिल है। कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में उतरा नामक एक कथा का वर्णन मिलता है, जिसमें इस व्रत के नियमों और उसके पालन से मिलने वाले उत्तम फलों के बारे में विस्तार से बताया गया है। व्रत रखने वाले लोग इस दिन विशेष रूप से उन अनाजों और खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं जो बिना जुताई के भूमि से प्राप्त होते हैं, जिससे शरीर और मन की सात्विक शुद्धि बनी रहती है। आज के समय में भी ऋषि पंचमी का यह पावन पर्व पारंपरिक उल्लास और निष्ठा के साथ मनाया जाता है। ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में लोग अपने घरों की साफ-सफाई कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं जहां विद्वान पंडित कथा का पाठ करते हैं और श्रद्धालुओं को इसके धार्मिक रहस्यों से अवगत कराते हैं। यह पर्व हमें हमारी महान सांस्कृतिक जड़ों और प्राचीन ऋषियों के आदर्शों की याद दिलाता है, जिनका अनुसरण कर हम एक आदर्श जीवन जी सकते हैं।
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