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शिक्षा

नालंदा की महानता: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने प्राचीन विश्वविद्यालय को बताया दुनिया का सबसे पहला आवासीय परिसर

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी ने ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय की जमकर सराहना की है, इसे दुनिया का सबसे पुराना आवासीय शिक्षण संस्थान बताया है जो बोलोग्ना से भी छह सौ साल आगे है।

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Ankit Yadav
27 अग 2026, 19:23
नालंदा की महानता: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने प्राचीन विश्वविद्यालय को बताया दुनिया का सबसे पहला आवासीय परिसर
संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख ने अपने हालिया बयानों में प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली की ऐतिहासिक विरासत को रेखांकित करते हुए नालंदा विश्वविद्यालय की भूरी-भरी प्रशंसा की है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह ऐतिहासिक स्थल मानवता के इतिहास में स्थापित होने वाला दुनिया का सबसे पहला आवासीय शिक्षण विश्वविद्यालय था। इस बात ने एक बार फिर से प्राचीन भारत की शैक्षणिक समृद्धि और वैश्विक स्तर पर इसके गहरे प्रभाव को दुनिया के सामने ला खड़ा किया है, जिससे देश भर के शिक्षाविदों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

प्राचीन बोलोग्ना विश्वविद्यालय से भी है पुराना इतिहास

अपने इस महत्वपूर्ण बयान में संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने इस बात का भी विशेष रूप से उल्लेख किया कि यह प्रसिद्ध अध्ययन केंद्र इटली के ऐतिहासिक बोलोग्ना विश्वविद्यालय से लगभग छह सौ वर्ष अधिक पुराना है। प्राचीन काल में यह स्थान ज्ञान, विज्ञान, दर्शनशास्त्र और खगोल विज्ञान के अध्ययन का एक सर्वप्रमुख वैश्विक केंद्र हुआ करता था जहाँ दुनिया भर के कोने-कोने से छात्र और विद्वान ज्ञान प्राप्त करने के लिए खींचे चले आते थे। इसकी विशाल वास्तुकला, विशालकाय पुस्तकालय और पठन-पाठन की उन्नत पद्धतियाँ इस बात की गवाही देती हैं कि उस दौर में भारत शिक्षा और बौद्धिक विकास के मामले में दुनिया का सिरमौर था। लखनऊ और उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश के शैक्षणिक हलकों में इस बड़ी वैश्विक सराहना के बाद जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। शिक्षाविदों और इतिहास प्रेमियों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पद पर बैठे किसी व्यक्ति द्वारा इस प्रकार प्राचीन भारतीय धरोहर को मान्यता दिया जाना हमारे गौरवशाली अतीत को वैश्विक मंच पर पुनर्स्थापित करने का एक बहुत बड़ा अवसर है। आधुनिक युग में प्राचीन नालंदा के स्वरूप को पुनर्जीवित करने के प्रयासों को भी इससे एक नई ऊर्जा और दिशा मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। भविष्य में इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय प्रशंसा से देश के ऐतिहासिक पर्यटन और शैक्षणिक शोध क्षेत्रों को भी अभूतपूर्व बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयानों से युवा पीढ़ी को अपनी प्राचीन संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान और गौरवशाली इतिहास से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी। नालंदा का यह ऐतिहासिक गौरव न केवल बिहार बल्कि पूरे भारत देश के लिए एक अमूल्य धरोहर है, जिसकी चमक आज भी पूरी दुनिया में उतनी ही प्रासंगिक और तेज बनी हुई है जितनी सदियों पहले हुआ करती थी।
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