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शिक्षा

साक्षरता का नया मील का पत्थर: पूर्ण साक्षरता हासिल करने की दहलीज पर हिमाचल प्रदेश, केवल 28,480 लोग ही हैं निरक्षर

हिमाचल प्रदेश शत-प्रतिशत साक्षरता दर हासिल करने के बेहद करीब पहुंच गया है। राज्य में अब केवल 28,480 लोग ही निरक्षर बचे हैं, जिन्हें शिक्षित करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

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Ankit Yadav
08 सित 2026, 16:58
साक्षरता का नया मील का पत्थर: पूर्ण साक्षरता हासिल करने की दहलीज पर हिमाचल प्रदेश, केवल 28,480 लोग ही हैं निरक्षर
शिक्षा के क्षेत्र में पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश ने एक बार फिर ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। राज्य अब सौ प्रतिशत साक्षरता के मुकाम को छूने से बस चंद कदम ही दूर खड़ा है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, पूरे प्रदेश में अब सिर्फ 28,480 व्यक्ति ही ऐसे बचे हैं जो लिख-पढ़ नहीं सकते हैं। इस विशेष आंकड़े के सामने आने के बाद राज्य के शिक्षा महकमे और प्रशासनिक अमले में भारी उत्साह देखा जा रहा है। विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर इस प्रगति की गूंज चारों तरफ सुनाई दे रही है, जो कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणास्त्रोत का काम कर रही है।

निरक्षरता उन्मूलन के लिए चल रहे हैं विशेष अभियान

निरक्षरता के इस बचे हुए छोटे से आंकड़े को भी पूरी तरह से समाप्त करने के लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है। सुदूर पहाड़ी इलाकों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले गांवों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि उन तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित की जा सके जो अभी तक इस रोशनी से वंचित रह गए थे। स्वयंसेवकों और शिक्षकों की टीमें घर-घर जाकर लोगों को प्रेरित कर रही हैं ताकि हर एक नागरिक बुनियादी पढ़ना-लिखना सीख सके। सरकार की इन लक्षित योजनाओं का असर भी जमीन पर साफ दिखाई दे रहा है और बहुत जल्द ही राज्य का हर एक नागरिक साक्षर श्रेणी में शामिल हो जाएगा। ऐतिहासिक रूप से देश के अग्रणी साक्षर राज्यों में शुमार रहने वाले हिमाचल ने अपनी साक्षरता दर को बढ़ाने के लिए हमेशा से ही प्राथमिक शिक्षा और वयस्क शिक्षा कार्यक्रमों पर विशेष जोर दिया है। महिला साक्षरता और दूरदराज के इलाकों में स्कूलों के विस्तार ने इस मुकाम को हासिल करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। पिछले कुछ दशकों में साक्षरता प्रतिशत में लगातार सुधार दर्ज किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप आज हम इस मुकाम पर पहुंचे हैं जहां निरक्षरों की संख्या सिमटकर महज 28,480 तक आ गई है।

भविष्य की योजनाएं और उम्मीदें

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से प्रयास जारी रहे, तो आने वाले कुछ ही समय में हिमाचल प्रदेश देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां शत-प्रतिशत आबादी पढ़ी-लिखी है। समाज के हर वर्ग, विशेषकर बुजुर्गों और वंचित समूहों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नए मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। सरकार और गैर-सरकारी संगठनों का यह सामूहिक प्रयास न केवल राज्य के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत कर रहा है, बल्कि विकास के नए रास्ते भी खोल रहा है। आने वाले दिनों में इन बचे हुए नागरिकों को भी साक्षर बनाने की दिशा में और अधिक प्रभावी कदम उठाए जाने की पूरी संभावना है।
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