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उत्तराखंड में छात्र आंदोलन: Gen Z पीढ़ी ने शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छेड़ा हल्ला
उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है, जहां युवा पीढ़ी यानी Gen Z अपने अधिकारों और बेहतर शिक्षा प्रणाली के लिए खुलकर सामने आ गई है और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है।
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Ankit Yadav
07 सित 2026, 15:20
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में इन दिनों शिक्षण प्रणाली की कमियों को लेकर युवाओं का गुस्सा खुलकर सड़कों पर दिखाई दे रहा है। आज की युवा पीढ़ी, जिसे आमतौर पर Gen Z के नाम से जाना जाता है, अपनी पढ़ाई की गुणवत्ता, भविष्य के अवसरों और बुनियादी शैक्षणिक अधिकारों को लेकर बेहद मुखर हो चुकी है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में छात्र और युवा संगठनों ने व्यवस्था के ढुलमुल रवैये के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उनका साफ तौर पर कहना है कि जब तक शिक्षा के स्तर में सुधार और पारदर्शी नीतियां नहीं लाई जातीं, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं।
छात्रों के तेवर और मुख्य मांगें
पारंपरिक आंदोलनों से हटकर इस बार का युवा नेतृत्व काफी आक्रामक और रणनीतिक रूप से सक्रिय नजर आ रहा है। सोशल मीडिया के दौर में पली-बढ़ी यह Gen Z पीढ़ी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी गोलबंदी करने में पूरी तरह कामयाब रही है। विश्वविद्यालयों से लेकर कॉलेज परिसरों तक, हर जगह छात्रों की जुबान पर एक ही सवाल है कि आखिर उनकी डिग्रियों और भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राज्य में शिक्षण संस्थानों की हालत बदतर होती जा रही है, जहां न तो समय पर परीक्षाएं हो रही हैं और न ही आधुनिक पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई का माहौल मिल पा रहा है।
भविष्य की अनिश्चितता और रोजगार के घटते अवसरों ने आग में घी का काम किया है। युवाओं का मानना है कि यदि समय रहते शिक्षा प्रणाली की इन बुनियादी खामियों को दूर नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य पूरी तरह अंधकारमय हो जाएगा। यही वजह है कि वे पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर सीधे तौर पर नीति निर्माताओं और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से जवाब मांग रहे हैं। इस जन-आंदोलन ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है क्योंकि छात्रों का यह तेवर किसी एक संस्थान तक सीमित न रहकर पूरे प्रदेश में एक बड़ी लहर का रूप ले चुका है।
आने वाले दिनों में इस युवा आक्रोश के और अधिक व्यापक होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही सकारात्मक रुख नहीं अपनाया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तीव्र करेंगे। दूसरी ओर, शासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी स्थिति को संभालने के लिए आंतरिक बैठकों का दौर चला रहे हैं। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सरकार इस युवा ऊर्जा और उनके वाजिब सवालों का किस प्रकार समाधान निकालती है, ताकि शैक्षणिक माहौल को पटरी पर लाया जा सके।