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शिक्षा की अलख: नक्सल प्रभावित बीजापुर में 53 बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहे शिक्षक

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिले बीजापुर से शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां कुछ समर्पित शिक्षक चुनौतीपूर्ण हालातों के बीच 53 बच्चों को पूरी तरह से मुफ्त शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

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Ankit Yadav
06 सित 2026, 17:32
शिक्षा की अलख: नक्सल प्रभावित बीजापुर में 53 बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहे शिक्षक
देश के दूरदराज और आंतरिक इलाकों में आज भी कई ऐसी जगहें हैं जहाँ शिक्षा की रोशनी पहुंचाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। छत्तीसगढ़ का बीजापुर जिला लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण चर्चा में रहता है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में बच्चों का भविष्य संवारने का जिम्मा कुछ साहसी और समर्पित शिक्षकों ने उठाया है। ये शिक्षक किसी बड़े सरकारी अमले या भारी-भरकम निजी संसाधन के बिना, अपनी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के बल पर स्थानीय बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाए हुए हैं।

शिक्षा से बदल रही है तकदीर

वर्तमान में इस विशेष पहल के तहत कुल तरेपन (53) बच्चों को बिना किसी शुल्क के पढ़ाया जा रहा है। इन बच्चों के परिवारों के लिए महंगी किताबें, कॉपियां और ट्यूशन फीस वहन करना बेहद मुश्किल होता है, ऐसे में यह मुफ्त शिक्षण व्यवस्था उनके लिए वरदान साबित हो रही है। स्थानीय स्तर पर लोग इस प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा कर रहे हैं क्योंकि इससे बच्चों के भीतर न केवल अकादमिक ज्ञान बल्कि एक बेहतर कल की उम्मीद भी जाग रही है। मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों और तमाम प्रशासनिक बाधाओं के बावजूद इन शिक्षकों का उत्साह कम नहीं हुआ है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव हमेशा से विकास के रास्ते में बड़ी रुकावट रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह के जमीनी प्रयास इस बात का प्रमाण हैं कि यदि नीयत साफ हो तो विपरीत परिस्थितियों में भी बदलाव लाया जा सकता है। इन बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ अन्य सहगामी गतिविधियों में भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है ताकि वे भविष्य में समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। स्थानीय निवासियों का मानना है कि इस प्रकार की पहल से क्षेत्र की पूरी युवा पीढ़ी की सोच में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और वे अपराध या हिंसा के साये से दूर रहकर अपने सपनों को पूरा कर पाएंगे। इस प्रेरक घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि समर्पण और सेवाभाव से बड़े से बड़े संकट को मात दी जा सकती है। बीजापुर के इन शिक्षकों का यह कदम आसपास के अन्य इलाकों के लिए भी एक मिसाल बन गया है। समाज के प्रबुद्ध वर्ग और जानकारों का कहना है कि यदि ऐसे छोटे-छोटे प्रयासों को संस्थागत या सरकारी स्तर पर थोड़ा और प्रोत्साहन मिल जाए, तो इन क्षेत्रों में साक्षरता दर और तेजी से सुधर सकती है। आने वाले समय में इन 53 बच्चों की सफलता की यह कहानी कई अन्य नौनिहालों के लिए भी प्रेरणा का मुख्य स्रोत बनेगी।
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