नई शिक्षा नीति के अगले चरण को लागू करते हुए, सरकार ने कक्षा 6 से लेकर कक्षा 12 तक के छात्रों के लिए कोडिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा बना दिया है। इस नीति का उद्देश्य भारत को वैश्विक तकनीकी हब के रूप में स्थापित करना है ताकि छात्र भविष्य के श्रम बाजार की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। सभी सरकारी और निजी स्कूलों को इस सत्र के अंत तक अपने बुनियादी ढांचे में बदलाव करने का निर्देश दिया गया है। शिक्षकों को भी इन नए विषयों को पढ़ाने के लिए विशेष ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार किए गए हैं।
पाठ्यक्रम की रूपरेखा नया पाठ्यक्रम व्यावहारिक ज्ञान पर केंद्रित है, जिसमें छात्र न केवल कोडिंग सीखेंगे बल्कि छोटे रोबोटिक प्रोजेक्ट्स भी बनाएंगे। छात्रों को यह सिखाया जाएगा कि कैसे एआई का उपयोग समस्याओं के समाधान के लिए किया जा सकता है। स्कूलों को हाई-स्पीड इंटरनेट और लैब सुविधाएं प्रदान करने के लिए विशेष फंड आवंटित किया गया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव छात्रों की तार्किक क्षमता (logical thinking) को विकसित करने में मदद करेगा, जो आज के समय में बेहद अनिवार्य है।
शिक्षकों का प्रशिक्षण शिक्षकों की भूमिका को देखते हुए सरकार ने एक विशाल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया है जहाँ वे कोडिंग और एआई के नवीनतम रुझानों के बारे में जानकारी ले सकते हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पूरा करने वाले शिक्षकों को सरकार द्वारा विशेष प्रमाण पत्र भी दिए जाएंगे। हालांकि, कुछ अभिभावकों ने इस बदलाव को लेकर चिंता व्यक्त की है, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पाठ्यक्रम छात्रों पर बोझ नहीं, बल्कि उन्हें कौशल संपन्न बनाने का एक सरल जरिया है। आने वाले वर्षों में इसका असर रोजगार के अवसरों पर निश्चित रूप से दिखाई देगा।