घटनाओं पर खामोश रहकर भी बहुत कुछ कह गईं अभिनेत्री हाल ही में दिल्ली के कालकाजी इलाके में एक दर्दनाक वारदात सामने आई थी और साथ ही जुमई से जुड़ा एक अन्य गंभीर मामला भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इन दोनों ही संवेदनशील और झकझोर देने वाली घटनाओं ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ऐसे समय में जब हर कोई अपनी प्रतिक्रिया दे रहा था, बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री कृति सेनन ने इस विषय पर अपना मौन व्रत तोड़ते हुए एक अनूठा और गहरा संदेश दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर कुछ भी बोलने से बचने के बावजूद अपनी प्रस्तुति और बयानों के माध्यम से समाज के उन तमाम तत्वों पर निशाना साधा है जो अक्सर इस प्रकार की घटनाओं के बाद पीड़ितों के चरित्र, उनके पहनावे या उनके ठिकाने पर सवाल खड़े करने लगते हैं। समाज में अक्सर यह देखने को मिलता है कि जब भी कोई आपराधिक घटना घटित होती है, तो जांच का दायरा आरोपियों के बजाय पीड़ित के कपड़ों और उसकी आवाजाही पर टिक जाता है। अभिनेत्री का यह मौन विरोध इस बात का प्रतीक है कि किसी भी महिला के साथ होने वाले अपराध के लिए कभी भी उसका पहनावा या उसकी लोकेशन जिम्मेदार नहीं हो सकती है। उनकी इस बेबाक और सधी हुई प्रतिक्रिया ने सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया तक हलचल पैदा कर दी है और हर तरफ इसी बात की चर्चा हो रही है कि कैसे एक कलाकार ने बिना शब्दों का इस्तेमाल किए समाज के एक बड़े और कड़वे सच को उजागर कर दिया है।
दोषी ठहराने की पुरानी और कुंठित मानसिकता पर कड़ा प्रहार हमारे समाज में यह एक पुरानी और बेहद विडंबनापूर्ण प्रवृत्ति बन चुकी है कि न्याय की मांग करने के बजाय, अक्सर पीड़िता से ही यह पूछा जाता है कि उसने उस समय क्या पहन रखा था या वह रात के वक्त उस स्थान पर क्या कर रही थी। कालकाजी और जुमई जैसी घटनाओं ने एक बार फिर से इस बात को उजागर कर दिया है कि किस तरह महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर लगातार पहरे बिठाए जाते हैं। जब भी कानून-व्यवस्था विफल होती है और कोई अप्रिय घटना होती है, तो समाज का एक वर्ग तुरंत अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए पीड़िता के कपड़ों और उसके तौर-तरीकों की समीक्षा करना शुरू कर देता है। इस प्रकार की मानसिकता न केवल अपराध को बढ़ावा देती है बल्कि अपराधियों के हौसले को भी बुलंद करती है क्योंकि उन्हें यह अहसास होता है कि समाज का एक बड़ा हिस्सा अंततः उन्हीं के पक्ष में खड़े होकर पीड़िता को ही कटघरे में खड़ा कर देगा। अभिनेत्री कृति सेनन ने इसी गहरी सामाजिक बीमारी और दोहरे मापदंडों पर करारा तमाचा जड़ा है। उनका यह दृष्टिकोण इस बात की याद दिलाता है कि जब तक हम समाज के रूप में यह सोचना बंद नहीं करेंगे कि महिला के साथ क्या गलत हुआ, तब तक ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना असंभव होगा। महिलाओं के अधिकारों और उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का समर्थन करने वाले बुद्धिजीवियों और आम जनता ने भी इस बात की सराहना की है कि कैसे एक लोकप्रिय हस्ती ने अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल इस गंभीर सामाजिक मुद्दे पर लोगों की आंखें खोलने के लिए किया है और उस सोच को ललकारा है जो हमेशा पीड़ित को ही कसूरवार ठहराने की ताक में रहती है।
कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी और भविष्य की उम्मीद जब देश के जाने-माने फिल्मी सितारे और सार्वजनिक हस्तियां इस तरह के संवेदनशील और ज्वलनशील मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखते हैं, तो उसका असर समाज के हर वर्ग पर बहुत दूरगामी होता है। बॉलीवुड में काम करने वाले कलाकारों की एक बहुत बड़ी फैन फॉलोइंग होती है, खासकर युवाओं के बीच उनका खासा प्रभाव देखा जाता है। ऐसे में जब कोई लोकप्रिय चेहरा जैसे कि कृति सेनन कालकाजी और जुमई की वारदातों के संदर्भ में इस प्रकार का मजबूत संदेश देती है, तो वह आम जनता के बीच एक सकारात्मक संवाद की शुरुआत करता है। आने वाले समय में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस तरह की मुखर आवाज़ें और अधिक मुखर होती हैं या फिर यह केवल कुछ ही बयानों तक सीमित रहकर रह जाती हैं। समाज के हर जिम्मेदार नागरिक और प्रशासनिक तंत्र को यह समझना होगा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों से निपटने के लिए केवल कानून बना देना ही काफी नहीं है, बल्कि समाज की सोच में एक बुनियादी बदलाव लाना भी उतना ही जरूरी है। यदि लोग यह समझना शुरू कर दें कि एक महिला का पहनावा या उसकी स्वतंत्रता उसकी सुरक्षा का पैमाना नहीं हो सकती, तभी इस प्रकार की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। जनता की यह अपेक्षा है कि आने वाले दिनों में और भी बड़ी हस्तियां इस मुहिम से जुड़ेंगी और उन तमाम रूढ़िवादी ताकतों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएंगी जो महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि कला और कलाकारों का दायित्व केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्र और समाज के उत्थान में भी उनकी एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका होती है।