सिनेमाघरों में रिलीज के साथ ही फिल्मों के बीच वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो चुकी है और शुरुआती आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि दर्शक किस कहानी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, फिल्म 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर अपने पहले ही दिन उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हुए करोड़ों रुपये की शानदार कमाई दर्ज की है। इस शानदार ओपनिंग ने यह साफ कर दिया है कि पौराणिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर आधारित कहानियों का क्रेज आज भी दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। इसके विपरीत, काफी चर्चा में रही दूसरी फिल्म 'वाइब-दायरा' का जादू टिकट खिड़की पर उस स्तर का असर छोड़ने में नाकामयाब रहा जिसकी उम्मीद ट्रेड एनालिस्ट द्वारा की जा रही थी। पहले दिन के ये आंकड़े केवल शुरुआती रुझान हैं, लेकिन इन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सिनेमा प्रेमियों का रुझान किस खास शैली की तरफ अधिक है।
इस तरह के बड़े बॉक्स ऑफिस क्लैश के पीछे फिल्मों की मार्केटिंग रणनीतियां, उनकी स्टार कास्ट, एडवांस बुकिंग के आंकड़े और दर्शकों के बीच बनी प्री-रिलीज हाइप जैसे कई अहम कारक जुड़े होते हैं। 'हनुमान अंश' के मेकर्स ने जिस तरह से फिल्म की थीम को डिजाइन किया और भारतीय पौराणिक कथाओं के तत्वों को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा, उसने फिल्म के पक्ष में एक मजबूत माहौल तैयार करने का काम किया। दूसरी तरफ, 'वाइब-दायरा' ने आधुनिक जीवनशैली, युवाओं की पसंद और शहरी परिवेश को अपनी यूएसपी बनाने की कोशिश की थी, लेकिन शहरी मल्टीप्लेक्स को छोड़कर बड़े पैमाने पर दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में यह फिल्म थोड़ी पिछड़ती हुई नजर आई। जानकारों का मानना है कि आज का दर्शक सिर्फ दिखावे या सतही वाइब के बजाय कहानी में गहराई और जुड़ाव तलाशता है, और यही वजह है कि पारंपरिक और दमदार विषयों पर आधारित फिल्में बॉक्स ऑफिस पर लंबी रेस का घोड़ा साबित होती हैं।
आने वाले दिनों में यानी पहले वीकेंड के दौरान इन दोनों ही फिल्मों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि वर्किंग डेज और वीकेंड के कलेक्शन ही किसी भी फिल्म के भविष्य का वास्तविक फैसला करते हैं। 'हनुमान अंश' को जिस प्रकार से पहले दिन दर्शकों का भारी समर्थन मिला है और पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ जनरेट हुआ है, उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि शनिवार और रविवार को इसके कारोबार में और भी भारी उछाल देखने को मिल सकता है। वहीं दूसरी ओर, 'वाइब-दायरा' की टीम को अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है ताकि वे दर्शकों को सिनेमाघरों की तरफ आकर्षित करने के लिए कुछ नए प्रयास कर सकें। कुल मिलाकर, फिल्म उद्योग में इस प्रकार के मुकाबले हमेशा से मनोरंजन के स्तर को ऊंचा उठाते रहे हैं और अंततः इसका फायदा दर्शकों को ही मिलता है जिन्हें अलग-अलग जॉनर की कहानियां देखने का मौका मिलता है।