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लोक संस्कृति का जादू: लता मंगेशकर का 68 साल पुराना असमिया गीत सिनेमा जगत में आज भी गूंज रहा है

भारतीय सिनेमा के सुनहरे इतिहास में स्वर कोकिला लता मंगेशकर का गाया हुआ एक पुराना गीत आज भी अपनी खास सांस्कृतिक पहचान और सुरीलेपन के कारण दर्शकों के दिलों पर राज कर रहा है।

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Ankit Yadav
16 सित 2026, 16:15
लोक संस्कृति का जादू: लता मंगेशकर का 68 साल पुराना असमिया गीत सिनेमा जगत में आज भी गूंज रहा है
भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम इतिहास में संगीत प्रेमियों के बीच स्वर कोकिला लता मंगेशकर की आवाज का जादू हमेशा से सिर चढ़कर बोलता रहा है। उनके गाए हुए हजारों गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं, लेकिन कुछ ऐसे अनमोल नगमे भी हैं जो किसी खास क्षेत्र की संस्कृति और लोक कला को अमर बना देते हैं। ऐसा ही एक पुराना और बेहद लोकप्रिय गीत असम की लोक संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है, जो पिछले 68 सालों से भारतीय सिनेमा जगत और संगीत प्रेमियों के बीच अपनी अनूठी गूंज बनाए हुए है। इस गीत ने न केवल पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मुख्यधारा के सिनेमा तक पहुंचाया, बल्कि यह साबित कर दिया कि बेहतरीन संगीत भौगोलिक सीमाओं से परे होता है।

असमिया लोक संस्कृति और संगीत का अनूठा संगम

इस विशेष गीत की बात करें तो इसने अपनी रिलीज के बाद से ही दर्शकों के दिलों में एक विशेष स्थान बना लिया था। संगीत जगत के जानकारों का मानना है कि ऐसे गीत किसी भी राज्य की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। पिछले 68 वर्षों के लंबे सफर के दौरान भारतीय सिनेमा में अनगिनत बदलाव आए, संगीत के ट्रेंड बदले और नई शैलियों ने जन्म लिया, लेकिन इस क्लासिक धुन और लता मंगेशकर के जादुई सुरों का आकर्षण कम होने के बजाय समय के साथ और अधिक मजबूत होता गया है। आज की युवा पीढ़ी भी इस ऐतिहासिक रचना की गहराई और उसकी सादगी की कायल है।

सांस्कृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा

इस तरह के पुराने और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध गीतों का जिक्र होना इस बात का प्रमाण है कि हमारी पारंपरिक जड़े कितनी मजबूत हैं। पूर्वोत्तर राज्यों की लोक धुनों और शास्त्रीय गायन का यह बेजोड़ मिश्रण आज भी शोधकर्ताओं और संगीतकारों के लिए अध्ययन का विषय बना हुआ है। जब भी ऐसे कलात्मक पहलुओं पर चर्चा होती है, तो लता मंगेशकर की वह सुरीली आवाज और उस दौर का संगीत अपने आप जीवंत हो उठता है। आने वाले समय में भी इस तरह की सांस्कृतिक धरोहरें भारतीय सिनेमा की नींव को मजबूत करती रहेंगी और नई पीढ़ी के कलाकारों को अपनी मिट्टी से जुड़े रहने की प्रेरणा देती रहेंगी, जिससे यह अमर गीत आने वाले कई दशकों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेगा।
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