मंच पर सजी विविधता की अनूठी छटा राजधानी में आयोजित 'रंग ए भारत' कार्यक्रम के दौरान देश के कोने-कोने से आई लोक-संस्कृतियों की अद्भुत झलक देखने को मिली जहां विभिन्न राज्यों के पारंपरिक नृत्यों और संगीतमय प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। इस विशेष सांस्कृतिक आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारत की विशाल सांस्कृतिक विरासत को एक साझा मंच प्रदान करना था ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और पारंपरिक कलाओं से भली-भांति परिचित हो सके। मंच पर प्रस्तुत किए गए हर एक कला रूप ने अपनी अनूठी शैली, विशिष्ट वेशभूषा और पारंपरिक वाद्यों की धुनों के माध्यम से स्थानीय सभ्यता की गहरी छाप छोड़ी। कलाकारों ने अपनी ऊर्जावान और भावपूर्ण प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और हर दर्शक इस भव्य सांस्कृतिक संगम का हिस्सा बनकर गौरवान्वित महसूस कर रहा था।
लोक कलाओं के संरक्षण का बढ़ता महत्व भारत जैसे विशाल देश में हर राज्य और क्षेत्र की अपनी एक अलग सांस्कृतिक पहचान, लोकगीत, नृत्य और कला शैली होती है जो सदियों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। आधुनिकता और पश्चिमी प्रभाव के इस दौर में कई पारंपरिक लोक कलाएं अपनी पहचान खोने की कगार पर पहुंच चुकी हैं, ऐसे में 'रंग ए भारत' जैसे मंच इन विलुप्त हो रही विधाओं को पुनर्जीवित करने और उन्हें मुख्यधारा में लाने का काम करते हैं। इस तरह के आयोजनों के पीछे का मुख्य विचार विभिन्न संस्कृतियों के बीच आपसी मेलजोल को बढ़ावा देना और देश की सामाजिक व सांस्कृतिक एकता को और अधिक मजबूत करना है। जब दूर-दराज के गांवों और अंचलों से आए कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं, तो उन्हें न केवल एक बड़ा मंच मिलता है बल्कि कलाप्रेमियों के बीच उनकी प्रतिभा को उचित सम्मान और पहचान भी प्राप्त होती है, जो सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की दिशा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम साबित होता है।
भविष्य की संस्कृति और आयोजनों की दिशा इस सफल आयोजन के बाद से कला जगत और दर्शकों के बीच इस बात की प्रबल चर्चा है कि भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों का दायरा और अधिक व्यापक किया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण और पारंपरिक कलाकारों को अपनी कला दिखाने का अवसर मिल सके। सांस्कृतिक संगठनों और कला प्रेमियों का मानना है कि यदि इस तरह के उत्सव देश के छोटे शहरों और शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचाए जाएं, तो युवा वर्ग में अपनी प्राचीन संस्कृति के प्रति रुचि और सम्मान में काफी वृद्धि होगी। आने वाले दिनों में इस प्रकार के मंचों के माध्यम से न केवल लोक कलाकारों को आर्थिक और सामाजिक संबल मिलने की उम्मीद है, बल्कि देश की सांस्कृतिक कूटनीति और पर्यटन को भी एक नया बढ़ावा मिलेगा। आयोजकों और सहभागियों का उत्साह यह संकेत देता है कि भारत की सांस्कृतिक विविधता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है और इस ताकत को संजोए रखने के लिए ऐसे निरंतर प्रयास आने वाले समय में भी जारी रहेंगे।