कंटाप
NEWS
गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
PM बोले-कुछ लोग विदेशों में भारत को बदनाम कर रहे: कांग्रेस कब तक अपने फेल प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश क...      सऊदी अरब में बांग्लादेशी महिला कामगार कितनी सुरक्षित हैं?      मुझे गालियां पड़ेंगी, लेकिन...; योगेंद्र यादव ने कहा- अभी मोदी का इस्तीफा नहीं चाहते लोग      Tiger Shroff Attack Case में बड़ा खुलासा, वारदात से पहले शूटरों ने की थी बंदूक चलाने की प्रैक्टिस, हुआ था म      Rain Alert: बन गया है कम दबाव का क्षेत्र, इन राज्यों में होने जा रही मूसलाधार बारिश, आंधी तूफान का भी अलर्ट      'पाकिस्तान को अलग-थलग नहीं कर सकता भारत', मार्को रुबियो के बयान पर बोले पाकिस्तानी डिफेंस एक्सपर्ट      हरियाणा में बिजली कर्मियों की हड़ताल: छुट्टी से 25 अधिकारी-कर्मचारी वापस बुलाए, चार राज्यों से मांगे कर्मचारी      कौन हैं निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर जो प्रकाश राज और अभिजीत दिपके साथ CJP का प्रदर्शन में शामिल होंगे     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
मनोरंजन

सिरोही में संस्कार का संगम: गोयली गांव के बच्चे सुना रहे हैं गीता के श्लोक

सिरोही के गोयली गांव में 8 से 15 साल के बच्चे मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर श्रीमद् भागवत गीता का पाठ कर रहे हैं। बीएपीएस संस्था की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में बच्चे भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का अभ्यास कर रहे हैं।

A
Ankit Yadav
05 अक्ट 2026, 16:39
सिरोही में संस्कार का संगम: गोयली गांव के बच्चे सुना रहे हैं गीता के श्लोक

गोयली में बाल गीता पारायण का आयोजन

सिरोही जिले के गोयली गांव में इन दिनों डिजिटल युग की चकाचौंध से दूर एक अनूठा शैक्षणिक और आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। बीएपीएस संस्था द्वारा यहाँ दो दिवसीय बाल गीता पारायण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें आठ से पंद्रह वर्ष की आयु के विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। आजकल के बच्चे अपना अधिकांश समय मोबाइल स्क्रीन और ऑनलाइन गेमिंग में बिताते हैं, लेकिन इस गांव के बच्चे गीता के श्लोकों का शुद्ध उच्चारण करके सभी को अचंभित कर रहे हैं। इन बच्चों की सहजता से की गई संस्कृत श्लोकों की प्रस्तुति ने पूरे ग्रामीण क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बना दिया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय ग्रंथों और उनकी गहराई से परिचित कराना है। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर बच्चों के व्यक्तित्व को सकारात्मक दिशा देने का एक सार्थक प्रयास है। इस आयोजन की सफलता ने यह प्रमाणित कर दिया है कि यदि बच्चों को सही दिशा और मार्गदर्शन मिले, तो वे आधुनिक तकनीक के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी बखूबी अपना सकते हैं।

महाभारत के प्रसंगों का जीवंत प्रदर्शन

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने श्रीमद् भागवत गीता के विभिन्न प्रसंगों को झांकियों के रूप में मंच पर प्रस्तुत किया, जिसे देखकर ग्रामीणों को महाभारत के कुरुक्षेत्र का अनुभव हुआ। मंच पर भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुए संवाद को बच्चों ने पूरी तन्मयता के साथ जीवंत रूप दिया। कोई बच्चा श्रीकृष्ण की भूमिका में था, तो कोई अर्जुन बनकर रथ का संचालन करता और शंख बजाता नजर आया। इस तरह के अभिनय के माध्यम से बच्चों को कर्मयोग की शिक्षा और गीता के संदेशों को आत्मसात करने का अवसर प्रदान किया गया। आयोजन से जुड़े हीरालाल ने बताया कि बच्चों को उनकी जड़ों से जोड़ना ही हमारी प्राथमिकता है। इस दौरान एक दस वर्षीय बालक ने कर्मण्येवाधिकारस्ते श्लोक का पाठ कर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों का यह आत्मविश्वास और उनकी तैयारी देखकर वहां मौजूद परिजन और ग्रामीण अत्यधिक उत्साहित दिखाई दिए। इन प्रस्तुतियों का एकमात्र लक्ष्य बच्चों के भीतर अनुशासन, धैर्य और जीवन की कठिन परिस्थितियों में सकारात्मक सोच विकसित करना है, जिससे वे भविष्य में असफलताओं से घबराने के बजाय मजबूती से सामना करना सीख सकें।

संस्कारों के माध्यम से जीवन मूल्यों की सीख

जीवन के प्रति सही दृष्टिकोण और संस्कार विकसित करना इस दो दिवसीय कार्यक्रम की मूल भावना है। आयोजकों का मानना है कि बच्चों को छोटी उम्र से ही धार्मिक शिक्षा के माध्यम से नैतिकता सिखानी चाहिए, ताकि वे कठिन समय में भी धैर्य बनाए रख सकें। गीता के माध्यम से उन्हें कर्म के प्रति निष्ठा और आत्मविश्वास बनाए रखने का संदेश दिया जा रहा है। बच्चों की सोच और उनकी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाना ही इस पूरी पहल का मुख्य आधार है। आज के दौर में जब मनोरंजन के साधन बदल रहे हैं, ऐसे में बच्चों को अपने ग्रंथों और जीवन मूल्यों से जोड़ना एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि यदि बच्चों को उचित वातावरण प्रदान किया जाए, तो वे अपनी संस्कृति के प्रति गर्व का अनुभव करते हैं। इस कार्यक्रम के समापन के साथ ही आयोजकों को विश्वास है कि बच्चे यहाँ से जो सीख लेकर जाएंगे, वह उनके भविष्य को संवारने में सहायक साबित होगी। ग्रामीण परिवेश में बच्चों की यह नई पहल भारतीय संस्कृति की मजबूती को दर्शाती है और भविष्य के लिए एक आदर्श उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज