निवेशकों को प्रोत्साहन देने की सरकारी योजना
केंद्र सरकार आने वाले बजट सत्र 2027-28 के दौरान पूंजी बाजार के लिए राहत के उपायों को लागू करने पर सक्रियता से मंथन कर रही है। पिछले दो वर्षों से भारतीय शेयर बाजार में कोई विशेष तेजी दर्ज नहीं की गई है, जिससे निवेशकों का उत्साह कम हुआ है। इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार शेयरों की बिक्री से होने वाले लंबे समय के मुनाफे, जिसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स कहा जाता है, की मौजूदा 12.5 प्रतिशत दर को कम करने पर विचार कर रही है। इसके अतिरिक्त विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को रुपये के स्थान पर डॉलर में होने वाले मुनाफे के आधार पर कर गणना करने की सुविधा देने की योजना है। सरकारी नीति निर्माताओं का मानना है कि इन सुधारों से बाजार के प्रति निवेशकों का भरोसा फिर से बहाल होगा और बाजार की सुस्त स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा।
बाजार भागीदारी और विदेशी निवेशकों की चुनौतियां
छोटे निवेशकों की बाजार में भागीदारी में हाल के वर्षों में बड़े बदलाव देखे गए हैं। मार्च 2020 में एनएसई में लिस्टेड कंपनियों में छोटे निवेशकों की हिस्सेदारी 6.58 प्रतिशत थी, जिसका कुल मूल्य 7.23 लाख करोड़ रुपये के करीब था। जून 2024 तक यह बढ़कर 7.66 प्रतिशत हो गई और इसका मूल्य 33.16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। हालांकि मार्च 2026 में यह घटकर 7.12 प्रतिशत रह गई और इसका मूल्य 28.97 लाख करोड़ रुपये दर्ज हुआ। सीडीएसएल के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2020 में डिमैट खातों की संख्या 2.12 करोड़ थी, जो सितंबर 2026 में बढ़कर 19.34 करोड़ के स्तर पर पहुंच गई है। विदेशी निवेशक भारत की मौजूदा कर प्रणाली को वैश्विक मानकों के मुकाबले कठिन मानते हैं। भारत में रुपये के अवमूल्यन के कारण डॉलर में मुनाफा कम होने के बावजूद कर की गणना रुपये के आधार पर होने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है, जो उनके निवेश को प्रभावित कर रहा है।
नीतियों में स्पष्टता और भविष्य का रोडमैप
भारत की कर व्यवस्था में स्थिरता की मांग लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष 5 जून को सरकार ने सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को विदहोल्डिंग टैक्स सहित लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स से राहत दी थी। भारतीय स्टेट बैंक की 12 अक्टूबर की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि शेयरों को रखने की अवधि को 2 से 3 साल तक बढ़ाया जाना चाहिए और इक्विटी पर कैपिटल गेन टैक्स को पूरी तरह हटाने पर विचार होना चाहिए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे एक सकारात्मक बहस माना है और निवेशकों की राय जानने में रुचि दिखाई है। भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार को न केवल कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ानी होगी बल्कि नियम-कानूनों में स्थिरता भी लानी होगी। इन सभी कारकों पर गौर करते हुए आगामी बजट में बाजार को नई गति देने वाले ठोस नीतिगत निर्णय लिए जा सकते हैं।