नीतिगत बैठक और केविन वॉर्श का संबोधन
अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नाम से मशहूर फेडरल रिजर्व की तरफ से आने वाले सप्ताह में ब्याज दरों के संबंध में ताजा घोषणा की जाएगी। वित्तीय जगत के जानकारों का मानना है कि इस बार असली उत्सुकता दर के आंकड़े से ज्यादा इस बात को लेकर है कि बैंक के प्रमुख केविन वॉर्श भविष्य की मौद्रिक नीति का क्या रोडमैप पेश करते हैं। विश्लेषक यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या सितंबर महीने के मुद्रास्फीति आंकड़े इस बैंक के लिए कोई बड़ा बदलाव लाएंगे। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि अमेरिकी बैंक आगामी समय में दरों में बढ़ोतरी की गति तय करने के लिए किन पैमानों को अपनाएगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 28 अक्टूबर को अमेरिकी समयानुसार चेयरमैन केविन वॉर्श एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे जिस पर पूरी दुनिया के निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है। बाजार के तमाम लोग यह देखना चाहते हैं कि केंद्रीय बैंक बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने के वास्ते क्या ठोस रणनीति सामने रखता है। पिछले पांच वर्षों से अधिक लंबे समय से महंगाई दर लगातार 2% के तय लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है जो चिंता का विषय है।
ब्याज दर चक्र और बाजार के अनुमान
वेलिंगटन मैनेजमेंट संस्था से जुड़ी वैश्विक व्यापक आर्थिक विश्लेषक जूही धवन के मुताबिक कारोबारी अब अक्टूबर माह की बैठक में आने वाले छोटे फैसलों के बजाय इस पूरी बढ़ोतरी के अंतिम पड़ाव पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। वर्तमान समय में बाजार का आकलन यह कहता है कि फेडरल रिजर्व आने वाले समय में 2027 की पहली तिमाही तक अधिक से अधिक तीन बार दरों में इजाफा कर सकता है जिसे एक सीमित बढ़ोतरी माना जा रहा है। धवन के बयानों के अनुसार इतिहास में ऐसे भी मौके आए हैं जब इस अमेरिकी बैंक ने दरों को बढ़ाने से पहले बेहद सीमित कदम उठाए और फिर उन्हें रोक दिया। यह पूरा घटनाक्रम इस धारणा के बिल्कुल अनुकूल बैठता है कि केंद्रीय बैंक ने पिछले साल श्रम बाजार को मंदी से बचाने के लिए जो तीन बार दरें घटाई थीं, अब उन्हें वापस लिया जा रहा है। हालांकि विश्लेषक धवन ने इस बात से भी पूरी तरह पर्दा नहीं उठाया कि केंद्रीय बैंक नीति को और अधिक कड़ाई से भी लागू कर सकता है।
भविष्य की अनिश्चितता और अर्थशास्त्रियों की राय
पूर्वानुमान से जुड़ी कंपनी एलएच मेयर के सह-संस्थापक डेरेक टैंग का ऐसा सोचना है कि बाजार फिलहाल यह तय करने में काफी जद्दोजहद कर रहा है कि यह चक्र आखिरकार कब थमेगा। टैंग ने यह सवाल उठाया है कि क्या खुदरा महंगाई के 2% पर पहुंचते ही दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला पूरी तरह थम जाएगा। उनके मुताबिक पहले के अध्यक्ष इस तरह की सख्ती खत्म होने को लेकर कुछ स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूर साझा करते थे। मिसाल के तौर पर बैंक तब तक दरों को ऊपर ले जा सकता था जब तक मूल मुद्रास्फीति पर्याप्त नीचे न आ जाए। हालांकि मौजूदा प्रमुख वॉर्श ने अभी तक अपने रुख को लेकर कोई भी स्पष्ट संकेत नहीं दिए हैं। इस अंतिम दर का सीधा असर तमाम कर्ज लेने वालों और मकान खरीदने के इच्छुक आम नागरिकों की जेब पर पड़ेगा। यदि दरों में बहुत अधिक बढ़ोतरी की गई तो पूंजी की बढ़ती लागत आर्थिक पहिये पर भारी दबाव बना सकती है। मई माह में अपना कार्यभार संभालने के बाद से वॉर्श ने संवाद के तरीके में बड़े बदलाव किए हैं। उनका मानना है कि अधिक विवेकपूर्ण नीति से बाजारों को स्थिति का खुद आकलन करने में मदद मिलती है। इसके विपरीत न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के प्रोफेसर निकोलस इकोनोमाइड्स का तर्क है कि वॉर्श का यह तरीका एक बड़ी चूक साबित हो सकता है। एक साक्षात्कार के दौरान इकोनोमाइड्स ने कहा कि नए प्रमुख ने बाजार की बात सुनकर एक सुसंगत दिशा तय करने का मौका गंवा दिया है।