प्रदर्शन और गिरफ्तारी का पूरा मामला
गोरखपुर में मंगलवार को कांग्रेस पार्टी के एक कार्यकर्ता को जमानत मिलने के बाद जेल से राहत मिली है। यह पूरा घटनाक्रम सोमवार को हुए एक बड़े प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ था, जब कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कथित अनियमितताओं को लेकर अपना आक्रोश व्यक्त किया था। दोपहर लगभग 12 बजे सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता राम प्रसाद बिस्मिल पार्क में एकत्र हुए थे। यहाँ से सभी ने सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय तक मार्च निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाने की योजना बनाई थी। पुलिस ने मौके पर पुतला छीनने का प्रयास किया, जिससे कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसी हंगामे के बीच पुलिस ने एक कार्यकर्ता मुन्ना शाही को हिरासत में ले लिया था। बाद में कैंट दरोगा विनोद सिंह की तहरीर पर मुन्ना शाही और कोदई तिवारी सहित कई अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
पुलिसिया कार्रवाई पर कांग्रेस का रुख
घटना के अगले दिन कांग्रेस के जिला अध्यक्ष राजेश तिवारी अपने अन्य समर्थकों के साथ कैंट थाने पहुंचे और हिरासत में लिए गए कार्यकर्ता की रिहाई सुनिश्चित कराई। राजेश तिवारी ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस द्वारा दर्ज किया गया मामला पूरी तरह से फर्जी है और इसका उद्देश्य सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं को डराना और दबाना है। अध्यक्ष का आरोप है कि राज्य में पुलिस का रवैया बेहद खराब और तानाशाहीपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि हम गांधीवादी विचारधारा के अनुयायी हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करते हैं, इसलिए हमने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का रास्ता चुना था। मुख्यमंत्री के शहर में होने का लाभ उठाकर पुलिस ने अनावश्यक दबाव बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समाजवादी पार्टी के लोग होते तो शायद स्थिति कुछ और होती, लेकिन पुलिस ने जानबूझकर केवल कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को अपना निशाना बनाया है।
पार्टी का स्टैंड और भविष्य की रणनीति
पुलिस के साथ हुई झड़प और उसके बाद दर्ज हुए मुकदमे को लेकर कांग्रेस पार्टी ने अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर तैयारी शुरू कर दी है। जिला अध्यक्ष राजेश तिवारी ने इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भेज दी है। फिलहाल, स्थानीय इकाई अब आलाकमान से मिलने वाले अगले निर्देशों का इंतजार कर रही है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि वे प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के खिलाफ विरोध नहीं कर रहे थे, बल्कि उनका रोष सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ था। वे लगातार राष्ट्रपति से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पुलिस पर लगे आरोपों के बीच अब यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बन चुका है कि आगे की जांच कैसे आगे बढ़ती है। स्थानीय स्तर पर कांग्रेसी नेताओं का दावा है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ध्वस्त करने की यह एक सुनियोजित साजिश है, जिसे वे अपनी गांधीवादी रणनीति के माध्यम से चुनौती देते रहेंगे।