ठगी की वारदात और पुलिस का एक्शन
लखनऊ के आलमबाग स्थित स्वर्ण सिद्धि ज्वैलर्स के मालिक संजीव कुमार रस्तोगी को एक बड़े धोखाधड़ी गिरोह ने अपना शिकार बनाया है। आरोपी संजीव कुमार को जाली सोने की ईंटें थमाकर करीब 2.86 किलोग्राम सोने के गहने और 20 लाख रुपये नकद लेकर फरार हो गए थे। इस सनसनीखेज घटना की जानकारी मिलने के बाद चौक थाने की पुलिस सक्रिय हुई और तफ्तीश के दौरान मामले के तार हापुड़ से जुड़े मिले। लखनऊ पुलिस की एक विशेष टीम ने स्थानीय कोतवाली पुलिस के साथ मिलकर हापुड़ के कई संभावित ठिकानों पर अचानक दबिश दी। इस संयुक्त कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया है। दोनों संदिग्धों से लखनऊ पुलिस की टीम गहन पूछताछ कर रही है ताकि धोखाधड़ी में शामिल गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान की जा सके और लूटा गया सामान बरामद किया जा सके।
कैसे रची गई जालसाजी की साजिश
आरोपियों ने डेढ़ साल पहले रोहतक निवासी अजय चौधरी के माध्यम से सर्राफा कारोबारी संजीव कुमार रस्तोगी के साथ संपर्क साधा था। अजय ने परिवार में अपनी पैठ बनाकर कारोबारी का भरोसा हासिल कर लिया था और बीते 7 सितंबर 2026 को वह दो अज्ञात साथियों के साथ पीड़ित के घर पहुंचा। उन्होंने एक महिला के पति की आर्मी में मौत होने की झूठी कहानी गढ़ी और दावा किया कि उन्हें चार सोने की ईंटें मिली हैं। आरोपियों ने अपनी बेटियों की शादी की मजबूरी बताते हुए गहनों और कैश की मांग की। कारोबारी ने शुरुआत में मना किया था, लेकिन बाद में झांसे में आकर उन्होंने 2.86 किलो सोने के आभूषण और 20 लाख रुपये दे दिए। जब कारोबारी ने ईंटों की लैब में शुद्धता जांच कराने की बात कही, तो आरोपी घबराकर मौके से भाग निकले। जांच में वे सभी ईंटें केवल साधारण धातु की साबित हुईं।
गिरोह की तलाश और आगे की जांच
संजीव कुमार रस्तोगी की शिकायत पर चौक थाने में नामजद मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। यह मामला हाई-प्रोफाइल ठगी से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया और तत्काल अपनी जांच टीमों को विभिन्न जिलों में भेजा। हापुड़ के कोतवाली थाना प्रभारी सुरेश कुमार के अनुसार, लखनऊ पुलिस की टीम जांच के सिलसिले में हापुड़ पहुंची थी और अब पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के बाकी साथियों की तलाश जारी है। यह घटना सर्राफा कारोबारियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि वे अनजान लोगों के साथ किसी भी प्रकार के संदिग्ध लेन-देन से बचें। पुलिस अभी यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने पहले भी और कितने कारोबारियों को अपना निशाना बनाया है। हिरासत में लिए गए लोगों के खुलासे के बाद इस धोखाधड़ी से जुड़े अन्य कड़ियां खुलने की उम्मीद है।