हरियाणा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी द्वारा लिए गए इस महत्वपूर्ण फैसले के तहत अब किसी भी ऐसे अधिकारी या कर्मचारी को उसी जिले में दोबारा तैनाती नहीं दी जाएगी, जिसे पूर्व में किसी भी प्रकार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया हो। प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और जनता के बीच सरकारी महकमों की छवि को बेहतर करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है ताकि भ्रष्ट तत्वों का स्थानीय प्रभाव पूरी तरह से समाप्त किया जा सके और जांच प्रक्रियाओं में किसी प्रकार का अनुचित हस्तक्षेप न हो सके। अक्सर यह देखा जाता था कि विभागीय कार्रवाई या कानूनी प्रक्रियाओं के बाद भी ऐसे दागी कर्मियों की पुनः उसी क्षेत्र में वापसी हो जाती थी, जिससे शिकायकर्ताओं और आम नागरिकों में असुरक्षा का भाव पैदा होता था।
इस नीतिगत बदलाव के पीछे राज्य में बढ़ते भ्रष्टाचार के मामलों पर नकेल कसने की एक बड़ी प्रशासनिक मंशा काम कर रही है, जहां पिछले कुछ समय से एंटी करप्शन ब्यूरो ने अपनी कार्रवाई को काफी तेज कर दिया है। हरियाणा के विभिन्न जिलों में लगातार मिल रही घूसखोरी की शिकायतों और छापों के बाद यह महसूस किया गया कि केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए ऐसे संरचनात्मक बदलाव भी जरूरी हैं जो अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ सकें। पूर्व में कई ऐसे प्रकरण सामने आए थे जहां पकड़े जाने के बाद भी आरोपी अधिकारी अपने रसूख और स्थानीय संपर्कों के बल पर दोबारा उसी जिले या आसपास के महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थापित होने में सफल हो जाते थे, जिससे प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े होते थे।
आगामी समय में इस निर्णय के लागू होने से राज्य की प्रशासनिक मशीनरी में एक मजबूत संदेश जाने की पूरी उम्मीद है और इससे निचले तथा मध्यम स्तर के कार्यालयों में काम करने वाले कर्मियों में कानून का भय स्थापित होगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को जमीन पर उतारने की दिशा में इस प्रकार के कदम न केवल जनता का प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा मजबूत करते हैं, बल्कि ऐसे अपराधियों के हौसलों को भी पस्त करते हैं जो अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध वसूली में संलिप्त रहते हैं। ब्यूरो के इस निर्देश के बाद सभी संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी दागी कर्मी की पदस्थापना के समय उसकी पिछली सेवा पुस्तिका और भ्रष्टाचार के मामलों का पूरा रिकॉर्ड गंभीरता से जांचा जाए, ताकि नियमों की आड़ में कोई भी व्यक्ति गलत तरीके से लाभ न उठा सके।