कंटाप
NEWS
गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
PM बोले-कुछ लोग विदेशों में भारत को बदनाम कर रहे: कांग्रेस कब तक अपने फेल प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश क...      मुझे गालियां पड़ेंगी, लेकिन...; योगेंद्र यादव ने कहा- अभी मोदी का इस्तीफा नहीं चाहते लोग      सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को मौत की सज़ा दिए जाने से जुड़े वे सवाल जो हैं अनसुलझे      Rain Alert: बन गया है कम दबाव का क्षेत्र, इन राज्यों में होने जा रही मूसलाधार बारिश, आंधी तूफान का भी अलर्ट      Tiger Shroff Attack Case में बड़ा खुलासा, वारदात से पहले शूटरों ने की थी बंदूक चलाने की प्रैक्टिस, हुआ था म      'पाकिस्तान को अलग-थलग नहीं कर सकता भारत', मार्को रुबियो के बयान पर बोले पाकिस्तानी डिफेंस एक्सपर्ट      सोनम वांगचुक का केंद्र पर आरोप, बोले- लद्दाख से किए वादे पूरे करे सरकार      AIIMS से डीम्ड यूनिवर्सिटीज तक... NEET UG काउंसलिंग के बाद क्यों खाली रह गईं MBBS सीटें?     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
कानून

न्यायिक नजीर: सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा मामले में रद्द की रासुका हिरासत, यूपी सरकार पर लगाया 10 लाख का जुर्माना

उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत की गई एक नागरिक की हिरासत को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने पुलिस के समक्ष इकबालिया बयान को निवारक नजरबंदी का आधार मानने से इनकार करते हुए राज्य सरकार को 10 लाख रुपये मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया।

A
Ankit Yadav
30 सित 2026, 11:58
न्यायिक नजीर: सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा मामले में रद्द की रासुका हिरासत, यूपी सरकार पर लगाया 10 लाख का जुर्माना

पुलिस के सामने दिए बयान पर रासुका लगाना अवैध

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने संभल हिंसा से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए व्यवस्था दी कि पुलिस हिरासत में लिए गए बयान के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक पवित्र अधिकार है और कार्यपालिका बिना ठोस व स्वतंत्र साक्ष्यों के इसे छीन नहीं सकती।

उत्तर प्रदेश सरकार को मुआवजा भुगतान का सख्त आदेश

पीठ ने राज्य सरकार की प्रक्रियागत खामियों और शक्तियों के दुरुपयोग पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को अवैध रूप से हिरासत में रखने के एवज में एक महीने के भीतर 10 लाख रुपये का हर्जाना दिया जाए। न्यायालय ने यह भी साफ किया कि यदि भुगतान समय पर नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।

दिवंगत लॉ क्लर्क को समर्पित किया ऐतिहासिक फैसला

अदालत ने एक अत्यंत दुर्लभ और मानवीय पहल करते हुए अपने इस ऐतिहासिक फैसले को अपने उस युवा लॉ क्लर्क ऋत्विक देसवाल को समर्पित किया जिनका कुछ दिन पहले असमय निधन हो गया था। पीठ ने कहा कि युवा शोधकर्ता ने इस मामले के कानूनी पहलुओं को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कानूनी विशेषज्ञों ने इस फैसले को नागरिक अधिकारों की रक्षा में एक बड़ा मील का पत्थर बताया है।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज