प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डीसीपी का वीडियो वायरल
दिल्ली पुलिस के ईस्ट ज़िले के पुलिस उपायुक्त अभिषेक धनिया इन दिनों एक नए वीडियो क्लिप की वजह से चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बहुत तेज़ गति से सर्कुलेट हो रहा है, जिसमें वह मीडिया से मुखातिब होते हुए नजर आ रहे हैं। इस रिकॉर्डिंग के सामने आने के बाद इंटरनेट पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं और लोग इस पर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। इस कॉन्फ्रेंस के दौरान अधिकारी की जुबान से निकले हुए शब्दों ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अधिकारी एक बेहद गंभीर मामले की मीडिया को जानकारी दे रहे थे। वीडियो में साफ तौर पर सुनाई दे रहा है कि किस तरह से एक कुख्यात अपराधी के नाम का उच्चारण करते वक्त उनके मुख से एक विशेष और आदरपूर्ण संबोधन निकल गया। यह पूरा मामला अब आम जनता के बीच बातचीत का मुख्य विषय बन चुका है और हर कोई इस पर हैरान नजर आ रहा है। पुलिस विभाग के किसी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस प्रकार की शब्दावली का प्रयोग किया जाना लोगों को बहुत अजीब लग रहा है।
रंगदारी के मामले की जानकारी देते समय हुआ संबोधन
घटना के पीछे का मुख्य संदर्भ एक आपराधिक प्रकरण से जुड़ा हुआ है जिसमें कुल पच्चीस लाख रुपये की भारी भरकम रंगदारी का मामला सामने आया था। इस गंभीर अपराध से जुड़ी जानकारियों को साझा करने के लिए ही उक्त प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया था। इस दौरान डीसीपी अभिषेक धनिया उस कुख्यात अपराधी लॉरेंस बिश्नोई का जिक्र कर रहे थे। अपराधी के नाम का उल्लेख करते वक्त उनके द्वारा उसके आगे 'साहब' शब्द जोड़ दिया गया। इस सम्मानजनक तरीके से लिए गए नाम के बाद से ही पुलिस प्रशासन के रवैये पर तीखी बहस छिड़ गई है। आम नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का यह मानना है कि कानून के रखवालों द्वारा इस स्तर के अपराधियों को इस प्रकार का सम्मान देना बिल्कुल भी उचित नहीं है। लोग इस बात पर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं कि आखिर किस वजह से एक वरिष्ठ अधिकारी के मुँह से ऐसा संबोधन निकल गया। इस वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद से ही इंटरनेट पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है और हर तरफ इसी बात की चर्चा हो रही है कि पुलिस महकमे में ऐसी भाषा का प्रयोग क्यों किया जा रहा है।
सीजेपी संस्थापक की प्रतिक्रिया और अधिकारी की पृष्ठभूमि
इस पूरे मामले पर विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों की तरफ से भी कड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी इस वायरल वीडियो क्लिप को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया है। उन्होंने इस पर तीखा तंज कसते हुए यह टिप्पणी की है कि काश पुलिस विभाग यही शालीनता और शिष्टाचार उन शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों तथा कार्यकर्ताओं के प्रति भी दिखा पाता जो अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं। इस विवाद के सामने आने के बाद से ही एजीएमयूटी कैडर के दो हजार बारह बैच के आईपीएस अधिकारी अभिषेक धनिया और उनके द्वारा दिए गए इस बयान के चर्चे हर गली और चौराहे पर होने लगे हैं। आम जनता इस बात को लेकर अपनी अलग-अलग और तीखी प्रतिक्रियाएं दे रही है कि कैसे एक जिम्मेदार अधिकारी इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर सकता है। इस घटना ने एक बार फिर से कानून व्यवस्था संभालने वाले अधिकारियों के सार्वजनिक व्यवहार और उनके तौर-तरीकों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।