राजयोग के अभ्यास से मानसिक शांति और खुशहाली का संदेश वर्तमान समय में हर व्यक्ति किसी न किसी प्रकार की मानसिक उलझन या तनाव से जूझ रहा है, जिससे दैनिक जीवन और कार्यक्षमता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। इस गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए बीके सरोज ने राजयोग के नियमित अभ्यास को बेहद कारगर बताया है। उनका कहना है कि यदि व्यक्ति अपने व्यस्त दिनचर्या में से कुछ समय निकालकर ध्यान और राजयोग को अपनाए, तो उसका मन न केवल शांत रह सकता है बल्कि अंदर से हमेशा प्रसन्नचित्त भी महसूस कर सकता है। ध्यान की यह प्राचीन पद्धति मनुष्य को बाहरी दुनिया के शोरगुल से दूर ले जाकर उसकी आंतरिक ऊर्जा से जोड़ने का काम करती है। जब मस्तिष्क को विश्राम मिलता है और विचारों की श्रृंखला थमती है, तब स्वतः ही आंतरिक शांति का अनुभव होने लगता है। आज के इस दौर में जहां डिप्रेशन और एंग्जाइटी जैसी समस्याएं आम हो चुकी हैं, वहां इस तरह के आध्यात्मिक और मानसिक अभ्यासों का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
आधुनिक जीवनशैली में तनाव मुक्ति और ध्यान का महत्व भागदौड़ भरी इस आधुनिक जीवनशैली ने मानव जीवन को भौतिक सुविधाओं से तो भर दिया है, परंतु इसके साथ ही मानसिक सुकून को भी छीन लिया है। सुबह से लेकर शाम तक ˈडे̮ड्लाइन् का दबाव, परिवार की जिम्मेदारियां और भविष्य की अनिश्चितताएं व्यक्ति को लगातार तनाव की स्थिति में रखती हैं। ऐसे परिवेश में योग और अध्यात्म केवल धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं रह गए हैं, बल्कि वे जीवन जीने की एक अनिवार्य कला बन चुके हैं। जब हम राजयोग जैसी पद्धतियों का गहराई से विश्लेषण करते हैं, तो यह समझ में आता है कि यह मन को नियंत्रित करने का एक अचूक विज्ञान है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपनी भावनाओं पर काबू पाना सीखता है और नकारात्मक विचारों को खुद पर हावी नहीं होने देता। समाज के विभिन्न वर्गों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसे अभियानों और सत्रों की बहुत आवश्यकता है। विभिन्न संस्थान और आध्यात्मिक केंद्र समय-समय पर इस दिशा में कार्य करते हैं ताकि लोगों को तनावमुक्त जीवन जीने की सही दिशा दिखाई जा सके और वे समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकें।
सकारात्मक बदलाव और भविष्य की बेहतर जीवनशैली की दिशा यदि लोग अपने जीवन में राजयोग को एक नियमित दिनचर्या के रूप में शामिल कर लें, तो इसके दूरगामी और बेहद सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। न केवल व्यक्तिगत स्तर पर तनाव कम होगा, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में भी मिठास और सामंजस्य बढ़ेगा। जब एक व्यक्ति मानसिक रूप से शांत और प्रसन्न रहता है, तो उसका प्रभाव उसके आसपास के पूरे वातावरण पर पड़ता है। आने वाले समय में यह जरूरी हो गया है कि युवा पीढ़ी से लेकर बुजुर्गों तक सभी लोग मानसिक स्वास्थ्य के प्रति गंभीर हों और योग तथा ध्यान का दामन थामें। विभिन्न जानकारों का यह मानना है कि शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। बीके सरोज द्वारा दिए गए इस प्रकार के मार्गदर्शन से लोगों को एक नई दिशा मिलती है और वे अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित होते हैं। इस तरह के प्रयासों से एक स्वस्थ, शांत और खुशहाल समाज के निर्माण की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए जा सकते हैं।