यूट्यूबर के घर मेहमान बनीं निर्देशक
भारतीय फिल्म उद्योग की जानी-मानी हस्ती फराह खान अक्सर मशहूर हस्तियों के आशियानों का दीदार कराती हैं। इस सिलसिले की एक कड़ी के रूप में वह अपने कुक दिलीप को साथ लेकर मशहूर वीडियो निर्माता सौरभ जोशी के निवास स्थान पर जा पहुंचीं। वहां पहुंचने पर मेजबानों ने उनका बहुत आदर-सत्कार किया और इस मुलाकात के दौरान उन्होंने घर के अंदरूनी हिस्सों की झलक भी अपने दर्शकों को दिखाई। इस खास मुलाकात का मुख्य आकर्षण वहां पर परोसा गया पारंपरिक भोजन रहा जिसे मेहमानों के स्वागत के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया था। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की संस्कृति के साथ वहां का लजीज भोजन भी हर खाने के शौकीन को बहुत आकर्षित करता है। पहाड़ी व्यंजनों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे बहुत सरल तरीके से तैयार होते हैं और उन्हें पकाने में ज्यादा समय भी खर्च नहीं करना पड़ता है। इन अनोखे जायकों का अनुभव करने के बाद निर्देशक महोदया ने भोजन की गुणवत्ता की भरपूर प्रशंसा की और सभी व्यंजनों का स्वाद बेहद चाव से लिया। मेजबान परिवार ने अपनी संस्कृति की अनूठी छाप छोड़ते हुए मेहमान का स्वागत पारंपरिक आतिथ्य के साथ किया जिसे देखकर सभी लोग काफी प्रभावित हुए।
पारंपरिक व्यंजनों की खास रेसिपी
सौरभ जोशी की माताजी ने विशेष रूप से पहाड़ी व्यंजनों को अपने हाथों से तैयार किया जिसमें कई तरह के लजीज पकवान शामिल थे। उन्होंने आलू के गुटके बनाए जो देखने और खाने में बेहद खास लगते हैं और जिन्हें बनाने की प्रक्रिया बहुत ही सरल होती है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक लोहे के बर्तन में सरसों का तेल गर्म किया जाता है और उसमें जीरा, मेथी दाना, नमक, धनिया पाउडर, थोड़ी सी लाल मिर्च तथा हल्दी मिलाकर मसाला तैयार किया जाता है। इसके पश्चात उबले हुए टुकड़ों को इस मसाले में अच्छी तरह मिला दिया जाता है और ऊपर से बारीक कटी हरी मिर्च डाली जाती है। अंत में कस्तूरी मेथी और हरे धनिए की बारीक पत्तियां डालकर इसे पूरा किया जाता है। इसके अलावा भांग के बीजों से एक विशेष तीखी चटनी भी बनाई गई जिसके लिए बीजों को मिक्सर में पीसकर उसमें लहसुन की कलियां, धनिया पत्ती, नमक, जीरा और पानी मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाता है और अंत में नींबू का रस निचोड़ा जाता है। यह चटनी खाने में कुरकुरी लगती है और आलू के गुटकों के साथ इसका स्वाद और अधिक बढ़ जाता है। मेहमान के लिए पहाड़ी शैली में खीरे का रायता भी बनाया गया जिसमें कद्दूकस किए गए खीरे को ताजी दही में मिलाकर उसमें रायता मसाला, भुना जीरा और हरा धनिया मिलाया जाता है।
पहाड़ी थाली का अनूठा अनुभव
पहाड़ी व्यंजनों की इस अनूठी दावत में केवल कुछ खास चीजें ही नहीं बल्कि पूरी पारंपरिक थाली परोसी गई थी। माताजी ने फराह खान के लिए विशेष रूप से गहत और भट्ट की दाल के साथ चावल और रोटियां भी बनाई थीं। पर्वतीय इलाकों के इन पौष्टिक और पारंपरिक भोजनों को चखने के बाद मेहमान ने इसकी मुक्त कंठ से प्रशंसा की। यदि कोई भी व्यक्ति सामान्य भोजन से हटकर कुछ अलग और पारंपरिक स्वादों का आनंद लेना चाहता है तो वह इन स्थानीय व्यंजनों को घर पर आसानी से बना सकता है। इन व्यंजनों को बनाने में बिल्कुल भी अधिक समय नहीं लगता है और इन्हें झटपट तैयार किया जा सकता है। पहाड़ी खान-पान की यह सरलता और उसका अद्भुत स्वाद लोगों को अपनी ओर खींचता है। इस पूरी मुलाकात के दौरान यूट्यूबर के परिवार ने मेहमान का जिस प्रकार आतिथ्य सत्कार किया वह वाकई यादगार बन गया। पारंपरिक व्यंजनों की यह पूरी श्रृंखला न केवल खाने में स्वादिष्ट होती है बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत उत्तम मानी जाती है। इन लजीज व्यंजनों की रेसिपी जानने के बाद आम लोग भी अपने घरों में इस प्रकार का पहाड़ी खाना आसानी से बनाकर इसका आनंद ले सकते हैं।