कंटाप
NEWS
शनिवार, 29 अगस्त 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
तिब्बत में बाढ़ से तबाही कितनी हुई है, जानिए वहाँ क्यों है इतनी ख़ामोशी      राहुल गांधी का बीजेपी-आरएसएस पर निशाना, बोले- देश में दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई      महाराष्ट्र में दूध हुआ महंगा, 9 रुपये प्रति लीटर बढ़े दाम      सोनिया गांधी के संस्मरण 'बिलॉन्गिंग' को न छापने की रिपोर्ट पर पब्लिकेशन कंपनी ने जारी किया बयान      आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का न्यूयॉर्क में प्रोग्राम और ज़ोहरान ममदानी के विरोध पर अमेरिकी मीडिया में कैसी बहस      'वही रहेंगे या मैं ही रहूंगा', JU पर आगबबूला शुभेंदु अधिकारी बोले- इनको JNU की तरह ठीक कर दो      आंध्र प्रदेश: तीन साल के बच्चे को पुल पर अकेला रोता छोड़ पति-पत्नी ने लगाई गोदावरी नदी में छलांग, तलाश जारी      ताशकंद के लिए रवाना हुए पीएम मोदी, भारत के लिए बेहद अहम है शहर; मिला था एक जख्म     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
लोकल

ऐतिहासिक धरोहर: उत्तर प्रदेश सरकार अब एक हजार साल पुराने चंदवार किले का करेगी संरक्षण

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के प्राचीन स्मारकों और ऐतिहासिक धरोहरों को संवारने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इसी कड़ी में अब लगभग एक हजार साल पुराने ऐतिहासिक चंदवार किले को संरक्षित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है ताकि इस बहुमूल्य सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को बचाया जा सके।

A
Ankit Yadav
29 अग 2026, 13:36
ऐतिहासिक धरोहर: उत्तर प्रदेश सरकार अब एक हजार साल पुराने चंदवार किले का करेगी संरक्षण
उत्तर प्रदेश में हमारी पुरानी संस्कृति, ऐतिहासिक इमारतों और प्राचीन किलों को सहेजने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में राज्य के एक बेहद महत्वपूर्ण और प्राचीन स्थल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह ऐतिहासिक दुर्ग अपनी प्राचीनता और वास्तुकला के लिए जाना जाता है, लेकिन समय के साथ उचित रखरखाव न मिलने के कारण यह जर्जर स्थिति में पहुंच गया था। अब सरकार ने इस ऐतिहासिक धरोहर का कायाकल्प करने की पूरी योजना तैयार कर ली है ताकि आने वाली पीढ़ियां इस महान इतिहास से रूबरू हो सकें।

ऐतिहासिक महत्व और पृष्ठभूमि

इस प्राचीन किले का इतिहास सदियों पुराना है और स्थानीय संस्कृति में इसका विशेष स्थान रहा है। जानकारों का मानना है कि यह स्थल मध्यकालीन भारतीय इतिहास की कई महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह रहा है। सदियों पहले बने इस किले की दीवारों और अवशेषों में उस कालखंड की वास्तुकला और शाही जीवनशैली की झलक साफ दिखाई देती है। हालांकि, आधुनिक दौर में उपेक्षा के शिकार होने के कारण इस ऐतिहासिक धरोहर के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए थे। इतिहास प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों द्वारा लंबे समय से इसकी सुध लेने की मांग की जा रही थी, जिसे अब अमलीजामा पहनाने की तैयारी की जा रही है। संरक्षण कार्य के तहत इस प्राचीन किले के बचे हुए हिस्सों को मजबूत किया जाएगा और इसके आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस कार्य से न केवल इस ऐतिहासिक पहचान को नया जीवन मिलेगा, बल्कि पर्यटन को भी बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिलेगा। जब इस प्रकार के पुराने किलों और स्मारकों का पुनरुद्धार किया जाता है, तो देश-विदेश के सैलानी बड़ी संख्या में वहां खिंचे चले आते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। भविष्य की योजनाओं के तहत सरकार इस स्थान पर पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने पर भी विचार कर रही है। इसमें पहुंच मार्ग को सुधारना, प्रकाश व्यवस्था करना और पर्यटकों के लिए इतिहास से जुड़ी जानकारी दर्शाने वाले बोर्ड लगाना शामिल हो सकता है। स्थानीय लोगों ने सरकार के इस कदम की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही यह प्राचीन किला अपनी खोई हुई शान वापस पा लेगा। इस प्रकार के संरक्षण कार्यों से न केवल हमारी ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित रहती है बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के मन में अपने गौरवशाली अतीत के प्रति सम्मान की भावना भी जागृत होती है।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज