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बड़ी लापरवाही: सत्य निकेतन में बेसमेंट जलभराव और निर्माण के बीच मकान मालिकों पर भड़के स्थानीय लोग

सत्य निकेतन इलाके में चल रहे निर्माण कार्यों और बेसमेंट में जलभराव की गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी रोष देखा जा रहा है। लोगों का आरोप है कि भवन स्वामी सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे हैं और उन्हें इमारतों की कोई परवाह नहीं है।

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Ankit Yadav
07 सित 2026, 12:12
बड़ी लापरवाही: सत्य निकेतन में बेसमेंट जलभराव और निर्माण के बीच मकान मालिकों पर भड़के स्थानीय लोग
राजधानी के प्रमुख इलाकों में शुमार सत्य निकेतन में इन दिनों मकानों की खस्ताहाल स्थिति और सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं गहराती जा रही हैं। हाल ही में सामने आए ताजा मामलों के अनुसार, यहाँ की कई इमारतों के बेसमेंट में पानी भरा हुआ है, जिसके बावजूद मरम्मत और निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी रखे गए हैं। इस स्थिति ने आसपास रहने वाले लोगों की नींद उड़ा दी है क्योंकि वे किसी बड़े हादसे की आशंका से डरे हुए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जरा सी भी लापरवाही किसी बड़े खतरे को बुलावा दे सकती है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार लोग स्थिति की गंभीरता को समझने को तैयार नजर नहीं आ रहे हैं।

लापरवाही और उदासीनता

स्थानीय रहवासियों का स्पष्ट रूप से यह आरोप है कि यहाँ की संपत्तियों के मालिकों को अपनी इमारतों की सुरक्षा और उनमें रहने वाले तथा आसपास के लोगों की जिंदगी की कोई परवाह नहीं है। बेसमेंट में पानी का जमा रहना न सिर्फ संरचनात्मक कमजोरी को बढ़ावा देता है, बल्कि इससे गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा भी पैदा हो जाता है। इसके बावजूद, बिना किसी उचित जल निकासी या सुरक्षा इंतजाम के मरम्मत के काम कराए जा रहे हैं, जो नियमों का खुला उल्लंघन हैं। निवासियों का यह भी कहना है कि वे कई बार संबंधित पक्षों से अपनी चिंताएं साझा कर चुके हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है। शहरी क्षेत्रों में इस तरह की अनदेखी अकसर गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बनती है। जानकारों का मानना है कि मानसून या जलभराव के दौरान इमारतों की नींव कमजोर हो जाती है, जिससे ढहने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सत्य निकेतन के लोग अब प्रशासन से यह मांग कर रहे हैं कि ऐसे तमाम परिसरों की तुरंत जांच कराई जाए जहाँ इस प्रकार की लापरवाही बरती जा रही है। बिना सोचे-समझे और सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर कराए जा रहे निर्माण कार्यों पर रोक लगाना बेहद जरूरी हो गया है ताकि किसी भी अनहोनी को टाला जा सके। इस पूरे घटनाक्रम के बाद इलाके के लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है और वे स्थानीय निकायों से कड़े कदम उठाने की अपील कर रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस दिशा में उचित कदम नहीं उठाया, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। भवन स्वामियों की जिम्मेदारी है कि वे अपनी संपत्तियों का रखरखाव पूरी सुरक्षा के साथ करें, न कि नियमों को ताक पर रखकर लोगों की जान को खतरे में डालें।
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