मेयर और कमिश्नर के बीच तल्ख बहस
छिंदवाड़ा नगर पालिका निगम कार्यालय के भीतर मेयर विक्रम अहिके और निगम कमिश्नर चंद्रप्रकाश राय के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला। घटना उस समय हुई जब मेयर अपनी फाइलें लेकर कमिश्नर के चेंबर में पहुंचे थे। दोनों अधिकारियों के बीच करीब पांच मिनट तक बेहद तीखी बातचीत चली। मेयर ने आरोप लगाया कि बतौर निर्वाचित प्रतिनिधि उन्हें अपने वार्ड के कामकाज के लिए बार-बार कमिश्नर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उनका तर्क था कि बिना किसी कारण के फाइलों को अटकाया जा रहा है, जिससे जनता के हित प्रभावित हो रहे हैं। दूसरी ओर, कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि निगम के भीतर सभी प्रक्रियाएं सरकारी नियमों के दायरे में ही पूरी की जाएंगी। इस घटना के बाद नगर निगम प्रशासन में व्याप्त खींचतान खुलकर सामने आ गई है। स्थानीय विकास की धीमी रफ्तार को लेकर दोनों पक्षों के बीच स्पष्ट रूप से मतभेद दिखाई दे रहे हैं, जिसका सीधा असर अब शहर की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है।
विकास कार्यों पर प्रशासनिक मतभेद का असर
मेयर विक्रम अहिके के अनुसार, नगर निगम में फाइलें क्लियर कराने में बेवजह देरी की जा रही है, जिससे बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि शहर में पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है और नए ट्यूबवेल खनन के प्रस्ताव फाइलों में फंसे हुए हैं। इसके अलावा छोटे पुल और पुलिया निर्माण जैसे कार्य भी इसी वजह से रुके हुए हैं। मेयर ने इस स्थिति को एक बड़े कम्युनिकेशन गैप का नतीजा बताया और जोर दिया कि आपस में बैठकर समस्या सुलझाना जरूरी है, वरना शहर का विकास पूरी तरह ठप हो जाएगा। वहीं, कमिश्नर चंद्रप्रकाश राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि नियम विरुद्ध किसी भी काम को करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। कमिश्नर का दावा है कि जितने भी कार्य नियमानुसार वैध हैं, उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करने की कोशिश लगातार की जा रही है और विकास कार्यों को रोकने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
चुनावी साल और राजनीतिक पृष्ठभूमि का प्रभाव
छिंदवाड़ा नगर निगम में मेयर और प्रशासनिक मुखिया के बीच यह खींचतान ऐसे समय में हो रही है जब निगम चुनाव में अब एक साल से भी कम का वक्त बचा है। चुनाव करीब होने की वजह से मेयर और सभी स्थानीय पार्षद अपने वार्डों में ज्यादा से ज्यादा काम दिखाकर जनता को आकर्षित करने के लिए पुरजोर मेहनत कर रहे हैं। हालांकि, लोकसभा मतदान के दिन उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कांग्रेस उम्मीदवार नकुलनाथ के समर्थन में अपील की थी, जो काफी चर्चित रही थी। राजनीतिक वफादारियों में बदलाव के बीच अब निगम के भीतर बढ़ रहे इस विवाद ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। यदि दोनों पक्षों के बीच आपसी संवाद नहीं बढ़ा, तो आने वाले महीनों में निगम के कामकाज पर इसका और भी बुरा असर पड़ने की आशंका बनी हुई है, जिससे आम जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।