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मधुरै में आधुनिक सांस्कृतिक केंद्र का उद्घाटन: 'कीझाडी संग्रहालय' में पुरातात्विक अवशेषों के डिजिटलीकरण का कार्य पूर्ण

प्राचीन संगम कालीन सभ्यता के गौरवशाली इतिहास को प्रदर्शित करने वाले मधुरै के पास स्थित कीझाडी संग्रहालय में अब 3D और वर्चुअल रियलिटी (VR) के जरिए इतिहास देखा जा सकेगा।

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Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 18:37
मधुरै में आधुनिक सांस्कृतिक केंद्र का उद्घाटन: 'कीझाडी संग्रहालय' में पुरातात्विक अवशेषों के डिजिटलीकरण का कार्य पूर्ण
तमिलनाडु के समृद्ध और प्राचीन संगम कालीन इतिहास को दुनिया के सामने नए और आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत करने के लिए राज्य के पुरातत्व विभाग ने एक बहुत बड़ा तकनीकी काम पूरा कर लिया है। मधुरै-शिवगंगा सीमा पर स्थित प्रसिद्ध 'कीझाडी संग्रहालय' (Keezhadi Museum) में प्रदर्शित हजारों साल पुराने पुरातात्विक अवशेषों (जैसे मृदभांड, आभूषण, वजन मापक यंत्र और तमिल-ब्राह्मी लिपि वाले बर्तन) का उच्च परिभाषा में 3D डिजिटलीकरण और डिजिटल मैपिंग कार्य पूर्ण हो चुका है। अब दुनिया के किसी भी कोने से शोधकर्ता और पर्यटक वर्चुअल रियलिटी (VR) हेडसेट और ऑनलाइन ई-पोर्टल के माध्यम से वैगई नदी घाटी सभ्यता की उत्कृष्ट कलाकृति को देख और समझ सकेंगे।

2,600 साल पुरानी शहरी सभ्यता का डिजिटल प्रदर्शन

कीझाडी उत्खनन से यह साबित हो चुका है कि ईसा पूर्व छठी शताब्दी में वैगई नदी के तट पर एक अत्यंत विकसित और साक्षर नगरीय सभ्यता फल-फूल रही थी। संग्रहालय में नया स्थापित किया गया डिजिटल इंटरेक्टिव रूम (Interactive Gallery) आगंतुकों को उस काल की उन्नत जल निकासी व्यवस्था, बुनाई उद्योग और व्यापारिक रास्तों का सजीव अनुभव प्रदान करता है। राज्य सरकार ने इस संग्रहालय परिसर में एक आधुनिक ऑडियो-विजुअल थिएटर और बाल शिक्षा केंद्र भी जोड़ा है, ताकि स्कूली बच्चों को खेल-खेल में अपनी सांस्कृतिक जड़ों की जानकारी मिल सके।

पर्यटन और इतिहास अनुसंधान को मिला नया संबल

डिजिटलीकरण के इस काम से कीझाडी संग्रहालय में आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में कई गुना वृद्धि देखी जा रही है। पुरातत्व मंत्री ने बताया कि कीझाडी के अलावा राज्य के अन्य उत्खनन स्थलों (जैसे अदिचनल्लूर और पोरुंथल) के अवशेषों को भी जल्द ही इस डिजिटल ग्रिड से जोड़ा जाएगा। यह प्रयास न केवल तमिल भाषा और संस्कृति के प्राचीनत्व को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में मदद करेगा, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए इस अनमोल विरासत को सुरक्षित रखने में मील का पत्थर साबित होगा।
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