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मैदान या तालाब: पतारा में चार साल से अधर में खेल का मैदान, बच्चे परेशान

पतारा के खेल मैदान की बदहाली का आलम यह है कि पिछले चार वर्षों से यह जलभराव के कारण तालाब में तब्दील हो चुका है। यहाँ खेलकूद के नाम पर केवल पैसों की बर्बादी हुई है।

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Ankit Yadav
10 सित 2026, 14:05
मैदान या तालाब: पतारा में चार साल से अधर में खेल का मैदान, बच्चे परेशान
उत्तर प्रदेश के स्थानीय इलाकों में विकास कार्यों के दावों की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आ रही है, जहाँ जनता की गाढ़ी कमाई किस तरह प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ जाती है, इसका अंदाजा पतारा के इस बदहाल खेल मैदान को देखकर लगाया जा सकता है। स्थानीय निवासियों और बच्चों के खेलने के लिए प्रस्तावित इस मैदान की सुध लेने वाला कोई नहीं है। आलम यह है कि बीते चार सालों से यह पूरा परिसर किसी बड़े तालाब या पोखर की शक्ल ले चुका है, जिससे यहाँ आने वाले हर शख्स को भारी निराशा हाथ लगती है।

लाखों खर्च के बाद भी सिर्फ बाउंड्री

विकास के नाम पर इस प्रोजेक्ट पर सरकारी खजाने से लाखों रुपये बहाए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। इतनी भारी-भरकम राशि खर्च किए जाने के बावजूद मैदान के भीतर खेलकूद की बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के बजाय केवल बाहरी दीवार यानी बाउंड्री वॉल खड़ी करके काम को अधूरा छोड़ दिया गया। परिणाम यह हुआ कि उचित जल निकासी या समतलीकरण न होने के कारण बारिश और आसपास का पानी इसी घेरे के अंदर जमा होता चला गया। आज स्थिति यह है कि इस मैदान का कोना-कोना पानी से भरा हुआ है और खेल गतिविधियों के लिए तरस रहे नौनिहाल बच्चे केवल दूर खड़े होकर इस बदहाली को देखने विवश हैं।

मवेशियों का बसेरा बना खेल परिसर

जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों की उदासीनता का लाभ अब आवारा पशु उठा रहे हैं। जहाँ कभी युवाओं और बच्चों के कदमों की आहट गूंजनी चाहिए थी, वहाँ आज के समय में भैंस और बकरियां बेखौफ होकर चरती नजर आती हैं। बच्चों के खेलकूद का अधिकार इन प्रशासनिक लापरवाहियों की वजह से पूरी तरह छिन गया है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद उनके बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और कोई भी जनप्रतिनिधि इस समस्या के समाधान के लिए आगे नहीं आ रहा है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प और जरूरी होगा कि स्थानीय प्रशासन इस मामले का संज्ञान कब तक लेता है। क्षेत्रवासियों ने मांग उठाई है कि इस मैदान का तुरंत जीर्णोद्धार कराया जाए ताकि जलभराव की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो सके। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो जनता का गुस्सा और अधिक बढ़ सकता है, जिससे आगामी दिनों में विरोध प्रदर्शनों का दौर भी शुरू हो सकता है।
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