करवा चौथ पर भी जारी रहा नर्सों का प्रदर्शन
लखनऊ शहर के भीतर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी नर्सों ने अपना कार्य बहिष्कार पूरी तरह से जारी रखा हुआ है। आज करवा चौथ का पावन पर्व होने के बावजूद इन स्वास्थ्य कर्मियों ने अपने काम पर लौटने से साफ इनकार कर दिया है। जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन इस स्थिति से निपटने के लिए लगातार जरूरी कदम उठाने का प्रयास कर रहा है। प्रदर्शनकारी नर्सों का कहना है कि उनकी मांगें जब तक पूरी नहीं होंगी तब तक उनका यह आंदोलन ऐसे ही आगे भी जारी रहेगा। इस कार्य बहिष्कार की वजह से सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले आम मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी सामान्य चिकित्सा कार्य पूरी तरह से प्रभावित हुए हैं। दूर-दूर से इलाज कराने आए मरीजों और उनके तीमारदारों को बिना डॉक्टर या नर्स की मदद के ही वापस लौटना पड़ रहा है। अस्पतालों के गलियारों में सन्नाटा पसरा हुआ है और केवल कुछ ही जगहों पर वैकल्पिक व्यवस्था दिखाई दे रही है। वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर लगातार अपनी नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी बड़ी अप्रिय घटना को समय रहते टाला जा सके।
मांगों को लेकर अड़े हुए हैं स्वास्थ्य कर्मी
लखनऊ की इन प्रदर्शनकारी नर्सों ने अपनी विभिन्न पुरानी लंबित मांगों को लेकर यह सख्त कदम उठाया है। प्रशासन के कई नुमाइंदों ने आंदोलनरत कर्मियों से बातचीत करने की कई बार कोशिश की है लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आ पाया है। अस्पताल के भीतर काम काज पूरी तरह से ठप होने की वजह से प्रशासनिक अधिकारियों की मुश्किलें काफी हद तक बढ़ गई हैं। त्यौहार के दिन इस प्रकार का बड़ा विरोध प्रदर्शन होने के कारण आम जनता में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी इस पूरे मामले की गंभीरता को समझते हुए लगातार आंतरिक बैठकें आयोजित कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रही नर्सों का साफ तौर पर कहना है कि जब तक उनकी सभी जायज मांगों पर लिखित समझौता नहीं होता तब तक वे हड़ताल वापस नहीं लेंगी। आंदोलन स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो सके। इस बीच मरीजों के परिजनों ने भी जल्द से जल्द इस गतिरोध को समाप्त करने की गुहार लगाई है ताकि उनका सुचारू रूप से इलाज हो सके।
स्वास्थ्य सेवाओं और पिछली पृष्ठभूमि पर असर
किसी भी बड़े शहर में स्वास्थ्य सेवाओं का इस तरह अचानक प्रभावित होना आम नागरिकों के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय बन जाता है। लखनऊ के अस्पतालों में नर्सों द्वारा किया जाने वाला ऐसा कार्य बहिष्कार पूर्व में भी विभिन्न अवसरों पर देखने को मिला है जब वार्ताओं के विफल होने पर ऐसा कदम उठाया गया। इस तरह के आंदोलनों से न केवल चिकित्सा व्यवस्था चरमराती है बल्कि दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब मरीजों को सबसे ज्यादा कष्ट सहन करना पड़ता है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग हमेशा से ही यह प्रयास करते हैं कि इस प्रकार के गतिरोध को बातचीत के जरिए तुरंत हल कर लिया जाए ताकि अस्पताल सुचारू रूप से चलते रहें। त्योहारों के मौसम में इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन होने से प्रशासनिक मशीनरी की परीक्षा और अधिक कठिन हो जाती है। आने वाले समय में यह देखना बहुत महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और आंदोलनकारी नर्सों के बीच किस प्रकार का समझौता होता है जिससे व्यवस्था फिर से पटरी पर लौट सके। सामान्य जनता यही उम्मीद कर रही है कि जल्द ही दोनों पक्ष किसी मध्यम मार्ग पर पहुंचेंगे और अस्पतालों की सेवाएं पूरी तरह से बहाल हो जाएंगी।