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राजनीति

रणनीतिक हथियार नहीं: एससीओ शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने पाकिस्तान को सुनाई खरी-खोटी

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना नाम लिए पाकिस्तान पर करारा हमला बोला और दो टूक शब्दों में कहा कि हिंसा और विध्वंस को कभी भी रणनीतिक उपकरण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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Ankit Yadav
01 सित 2026, 20:24
रणनीतिक हथियार नहीं: एससीओ शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने पाकिस्तान को सुनाई खरी-खोटी
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के हालिया सम्मेलन में भारत का पक्ष रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान किसी भी देश का प्रत्यक्ष रूप से नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनका यह कड़ा संदेश स्पष्ट रूप से पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की ओर निर्देशित था। प्रधानमंत्री ने दुनिया भर के नेताओं के सामने इस बात पर विशेष जोर दिया कि उग्रवाद और विध्वंस जैसी गतिविधियों को किसी भी सूरत में कूटनीतिक या रणनीतिक लाभ हासिल करने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। ऐसे तरीकों का इस्तेमाल करने वाले देशों को यह समझना होगा कि यह मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है और इससे पूरी क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ता है।

आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति

भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस बात की वकालत करता रहा है कि चरमपंथ और शांति एक साथ नहीं चल सकते। एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान ने एक बार फिर पड़ोसी देश की उन गुप्त और प्रत्यक्ष नीतियों को बेनकाब कर दिया है जिनके जरिए वह अशांति फैलाने का प्रयास करता रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उन ताकतों के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना होगा जो हिंसा को बढ़ावा देती हैं। जब तक इन तत्वों पर पूरी तरह से लगाम नहीं लगाई जाती, तब तक क्षेत्रीय विकास और आपसी सहयोग के वास्तविक लक्ष्यों को हासिल करना असंभव बना रहेगा। भारत ने हमेशा से ही इस बुराई के प्रति जीरो टॉलरेंस का रवैया अपनाया है और वैश्विक स्तर पर भी इसी तरह की प्रतिबद्धता दिखाने की अपील की गई है। यह महत्वपूर्ण सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित किया गया है जब दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की यह टिप्पणी बेहद सामयिक मानी जा रही है। उन्होंने सदस्य देशों से आह्वान किया कि वे आपसी अविश्वास को पीछे छोड़कर साझा आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा पर अपना ध्यान केंद्रित करें। मंच पर मौजूद अन्य देशों के प्रतिनिधियों ने भी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी खुफिया तंत्र को मजबूत करने और मिलकर काम करने की आवश्यकता पर सहमति जताई। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह कड़ा संदेश वैश्विक कूटनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव और उसकी स्पष्ट विदेश नीति को दर्शाता है। इससे पहले भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत ने आतंकवाद के प्रायोजकों को बेनकाब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस शिखर सम्मेलन के बाद एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्षेत्रीय संगठनों को आतंकवाद के खात्मा के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। भारत के इस कड़े रुख से यह संदेश साफ चला गया है कि शांति और विकास चाहने वाले देशों को अब दोहरे मापदंडों को छोड़ना होगा और इस समस्या के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी।
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