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अनोखा सफर: बिहार की गलियों से निकलकर जापान की क्रिकेट टीम तक पहुंचे आईआईटी कानपुर के छात्र

बिहार की साधारण गलियों से निकलकर देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले एक प्रतिभावान खिलाड़ी ने जापान की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम तक का सफर तय कर एक अनूठा मुकाम हासिल किया है।

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Ankit Yadav
20 सित 2026, 12:01
अनोखा सफर: बिहार की गलियों से निकलकर जापान की क्रिकेट टीम तक पहुंचे आईआईटी कानपुर के छात्र

खेल और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी मेहनत के दम पर एक नया आयाम स्थापित करने वाले इस खिलाड़ी ने साबित कर दिया है कि लगन हो तो कोई भी सीमा आड़े नहीं आती है। मूल रूप से बिहार की पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले इस युवा ने अपनी शुरुआती और उच्च शिक्षा के दौरान ही खेल के प्रति अपनी गहरी रुचि को जिंदा रखा। अपनी अकादमिक यात्रा के तहत उन्होंने देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में गिने जाने वाले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी कानपुर से अपनी पढ़ाई पूरी की। तकनीकी शिक्षा की कठिन चुनौतियों के बीच भी उन्होंने अपने खेल प्रेम को कभी कम नहीं होने दिया और मैदान पर निरंतर अभ्यास जारी रखा, जिसका परिणाम यह निकला कि आज वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जापान की क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

इस प्रेरणादायक कहानी का संदर्भ इस बात से जुड़ा है कि कैसे भारत के विभिन्न कोनों से निकलने वाली प्रतिभाएं अपनी मेधा और दृढ़ संकल्प के बल पर वैश्विक मंचों पर अपनी पहचान बना रही हैं। आईआईटी कानपुर जैसे उच्च स्तरीय संस्थान में जहां अमूमन छात्रों का पूरा ध्यान इंजीनियरिंग और तकनीकी करियर पर केंद्रित रहता है, वहीं इस खिलाड़ी ने शिक्षा और खेल के बीच एक बेहतरीन संतुलन कायम किया। जापान में क्रिकेट का खेल उस रूप में लोकप्रिय नहीं है जिस प्रकार दक्षिण एशिया या अन्य पारंपरिक देशों में है, लेकिन वहां इस खेल को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में एक भारतीय मूल के और खासकर आईआईटी की पृष्ठभूमि वाले खिलाड़ी का वहां की राष्ट्रीय टीम तक पहुंचना न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि क्रिकेट अब भौगोलिक सीमाओं को पार कर चुका है।

उनकी इस सफलता से खेल प्रेमियों और विशेषकर देश के उन युवाओं में एक नया उत्साह संचारित हुआ है जो इंजीनियरिंग या अन्य तकनीकी क्षेत्रों में पढ़ाई करने के साथ-साथ अपने खेल के सपनों को भी पूरा करना चाहते हैं। खेल विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बहुमुखी प्रतिभा के धनी खिलाड़ी आने वाले समय में जापान में क्रिकेट के विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं और वैश्विक स्तर पर एसोसिएट देशों में खेल के स्तर को ऊपर उठाने में मददगार साबित होंगे। बिहार से लेकर कानपुर और फिर जापान की पिचों तक का यह सफर उन सभी महत्वाकांक्षी युवाओं के लिए एक मार्गदर्शिका की तरह है जो पारंपरिक करियर विकल्पों से हटकर अपने जुनून को मुकाम देने का जज्बा रखते हैं।

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